कल यानी सोमवार से गणेशोत्सव का आगाज हो रहा है। ग्रहों के शुभ संयोग के बीच घर-घर में गणपति विराजेंगे। अगले 10 दिन तक राजधानी में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
गणेशोत्सव को लेकर काफी समय से राजधानी में तैयारियां चल रही थीं। रविवार को बाजारों में खासी रौनक देखने को मिली। इस बार ज्यादातर लोग पर्यावरण का ध्यान रखते हुए गणेशजी की इकोफ्रेंडली मूर्तियां घर लेकर गए हैं। गणपति की विभिन्न रूपों में मूर्तियां तैयार की गई हैं।
गणपति को शंख से लेकर मुंबई के लाल बाग के राजा की तरह सिंहासन पर बैठाया गया है। डमरू, मोर व ऊं सिंहासन के साथ साथ आधे शिव के रूप में बनी मूर्तियां भी लोगों को लुभा रही हैं।
आधे से नौ फुट के साइज में उपलब्ध इन मूर्तियों की कीमत 100 रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक हैं। पंचांग के अनुसार अभिजित मुहूर्त सुबह 11.55 से दोपहर 12.40 बजे तक रहेगा। पूरे दिन शुभ संयोग होने से सुविधा अनुसार किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना कर सकते हैं।
राजधानी में करीब 100 से ज्यादा स्थानों पर गणेशोत्सव के बड़े बड़े पंडाल लगाए गए हैं। दिल्ली के मयूर विहार फेज एक स्थित श्रीशुभ सिद्धि विनायक मंदिर, द्वारका स्थित श्री सिद्धि विनायक मंदिर और राजीव चौक स्थित गणेश मंदिर में विशेष रूप से तैयारियां की गई हैं। लक्ष्मी नगर के विजय चौक पर बड़ा पंडाल सजा है। पीतमपुरा में कई फुट ऊंचे गणपति बप्पा विराजमान किए जाएंगे।
बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर पालिका सेंटर के पास गणेशजी के मंदिर में भी 10 दिन तक गणेशोत्सव का आयोजन होगा। इसके बाद भव्य रूप से यमुना में गणेश भगवान का विसर्जन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य अंबरीष कुमार शास्त्री बताते हैं कि गणेश चतुर्थी पर लंबे समय के बाद कई शुभ संयोग बन रहे हैं।
ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति से शुक्ल और रवियोग के अलावा सिंह राशि में चतुरग्रही योग है। इसका मतलब है कि सिंह राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ विद्यमान रहेंगे। यह काफी शुभ माना जाता है।