गेल (गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) की गैस से प्रदेश की इंडस्ट्रीज को ऊर्जा का नया स्रोत मिलेगा। यूपीएसआईडीसी की बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव पर मुहर लग चुकी है।
अब इस प्रस्ताव पर प्रदेश शासन और गेल के बीच एमओयू साइन होना है। एमओयू साइन होते ही उद्यमियों को सस्ती गैस मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
बिजली किल्लत की समस्या न केवल जिला गाजियाबाद बल्कि अन्य जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में भी है। कुछ उद्यमियों ने इससे निपटने के लिए जनरेटर लगा रखे हैं लेकिन छोटे उद्यमियाें के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
लिहाजा वह बिजली या गैस पर ही निर्भर हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ माह पूर्व लखनऊ में गेल अधिकारियों और शासन के वरिष्ठ अधिकारियाें के बीच वार्ता हुई थी। जिसमें प्रस्ताव पर रूपरेखा तैयार की गई। बाद में इस प्रस्ताव को यूपीएसआईडीसी की बोर्ड मीटिंग में रखा गया, जिसे पास कर दिया गया है।
यहां ट्रोनिका सिटी, बुलंदशहर औद्योगिक क्षेत्र, कविनगर, साहिबाबाद क्षेत्र समेत कई अन्य औद्योगिक क्षेत्राें को फायदा होगा। यूपीएसआईडीसी के आरएम मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि बोर्ड मीटिंग में वरिष्ठ अधिकारी गेल की गैस को औद्योगिक क्षेत्र में देने पर राजी हो गए हैं।
जिले में करीब 16 हजार से ज्यादा इंडस्ट्री हैं। वहीं हापुड़ और मेरठ को मिला दिया जाए तो यह संख्या 25 हजार से ज्यादा होगी। इसमें लघु उद्यमी करीब 20 से 25 प्रतिशत होगे। गेल आएगी तो उद्यमियों के पास विकल्प होगा। बिजली न मिलने पर उत्पादन बंद नहीं होगा। - नीरज सिंघल, प्रदेश महासचिव इंडियन इंडस्ट्रीज
गेल यदि औद्योगिक क्षेत्र में गैस देती है तो उद्यमी इसका स्वागत करेंगे। आईजीएल की तुलना में गेल की गैस सस्ती होगी। जिसका फायदा प्रदेश के लाखों उद्यमियों को मिलेगा। वहीं बिजली पर निर्भरता भी कम होगी। - अरुण शर्मा, अध्यक्ष गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन