ट्रांसलेशनल प्रौद्योगिकी एवं संस्थान की कार्यकारी निदेशक व प्रो.गगनदीप कांग ने विश्व की सबसे पुरानी वैज्ञानिक सोसायटी के सदस्य बनने का गौरव हासिल किया है। फरीदाबाद स्थित संस्थान की निदेशक कांग ऐसी पहली भारतीय महिला हैं जो देश में काम करते हुए इस सोसायटी की सदस्य बनी हैं।
वैज्ञानिक कांग को भारत में वैक्सीन विकसित करने और नैदानिक अनुवादकीय दवा के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए सदस्यता दी गई है। रॉयल सोसायटी ने भारतीय वैज्ञानिक को बच्चों में होने वाले आंत के संक्रमण और इसके कारण अन्य बीमारियों के खतरे से बचाव शोध की भी सराहना की है।
रॉयल सोसायटी की वेबसाइट पर कांग का प्रोफाइल 2019 में चुने गए सदस्यों में शामिल किया गया है। प्रोफाइल में कांग की उपलब्धियां बताई गई हैं। कांग ने रोटा वायरस, टाइफाइड जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी तंत्र बनाने में मदद की है।
बीमारियों की रोकथाम के लिए सफल वैक्सीन बनाए जा सके, इसके लिए भी कांग ने कई ट्रायल लैब स्थापित किए हैं। दो भारतीय कंपनियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद के लिए सफल वैक्सीन बनाने में सहायता की है। मौजूदा वक्त में भी कांग मानव प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के लिए काम कर रही हैं।
कांग की उपलब्धियों को फरीदाबाद स्थित ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी संस्थान ने भी अपनी वेबसाइट में शामिल किया है। इस तरह कांग ने सोसायटी के बीते 400 साल के इतिहास को बदला है।