केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार को बताया कि वैश्विक महामारी कोविड के दौरान वर्ष 2022 में भारत में 61.9 लाख विदेशी पर्यटक आए हैं। यह पिछले वर्ष की तुलना में विदेशी पर्यटकों के आगमन की संख्या में चार गुना वृद्धि है।
रेड्डी गुजरात दिवस के मौके पर कच्छ के रण में जी- 20 पर्यटन कार्य समूह की पहली बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने बताया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विजिट इंडिया 2023 मनाया जा रहा है।
पर्यटन क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन (एनडीटीएम) बनाया जा रहा है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए यूनिफार्म टूरिस्ट पुलिस को तैयार किया गया है। इसके अलावा शीर्ष 20 स्रोत देशों के विदेश स्थित भारतीय मिशनों में नोडल अधिकारी नियुक्त किये जा रहे हैं।
गुजरात दिवस के मौके पर आयोजित पर्यटन कार्य समूह की बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में पर्यटन क्षेत्र एक महत्वपूर्ण आर्थिक गुणक है। दरअसल, यह तेजी से आर्थिक विकास व रोजगार देने वाला है। पर्यटन मंत्रालय इस वर्ष को भारत की यात्रा पर ध्यान केंद्रित करते हुए विजिट इंडिया ईयर 2023 के रूप में मना रहा है।
यहां पर्यटकों को आध्यात्मिक अनुभव, वन्य जीव संसाधनों और प्राकृतिक सुंदरता के साथ सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलता है। वहीं, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने कहा कि पर्यटन हमें प्रकृति के करीब लाता है। पर्यटन से हम उस विरासत और संस्कृति को महसूस व अनुभव कर सकते हैं, जो हमें हमारे पूर्वजों से मिली है। पहले दिन ट्रोकिया, ब्राजील और इंडोनेशिया के प्रतिनिधियों ने पर्यटन पर अपनी बात रखी।
छोटे कोर्स में आतिथ्य व डिजिटल पाठ्यक्रम :
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने को पिछले साढ़े आठ साल में 1 बिलियन डॉलर (7,000 करोड़ रुपये ) का बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है। युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल बनाने के लिए लघु अवधि के आतिथ्य पाठ्यक्रम, कौशल परीक्षण और प्रमाणन, पूर्व शिक्षण की मान्यता, ऑनलाइन डिजिटल पाठ्यक्रम शुरू किये गए हैं। स्कूल और कॉलेजों में युवा पर्यटन क्लबों के माध्यम से भारतीय पर्यटन के युवा राजदूतों को तैयार किया जा रहा है। मिशन मोड में पर्यटन क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन (एनडीटीएम) तैयार किया जा रहा है। पहचान के लिए आधार और रीयल-टाइम भुगतान के लिए यूपीआई जैसे बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा बनाया गया है।