अब एक होटल में कई देशों के मेहमान ठहरेंगे
अब दिल्ली के एक होटल में एक ही देश के राष्ट्रपति व प्रतिनिधिमंडल के सदस्य नहीं ठहरेंगे। पहले ये तय हुआ था कि एक होटल में एक ही देश के प्रमुख व अन्य सदस्यों को ठहराया जाए। ऐसे में दिल्ली पुलिस को दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा व मेवात में 34 होटलों की जरूरत पड़ रही थी, मगर अब फाइनल ये तय हुआ कि एक ही होटल में तीन-चार देशों के प्रमुख व अन्य सदस्यों को ठहराया जाएगा। इस कारण होटलों की संख्या को अब 18 कर दिया गया है। इनमें से 16 होटल दिल्ली में व दो गुरुग्राम में हैं।
10 को इन मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रित किया जाएगा
10 सितंबर को सुबह पांच बजे से दोपहर एक बजे तक इन मार्गों पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा। इन दिनों विदेशी राष्ट्रध्यक्ष व राष्ट्रपति राजघाट जाएंगे। ये मार्ग हैं अजमेरी गेट की तरफ से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, श्यामा प्रसाद मुखर्जी (एसपीएम) रोड की तरफ से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, गीता कॉलोनी की तरफ से शांति वन चौक, विकास मार्ग की तरफ से आईटीओ, जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) मार्ग की तरफ से राजघाट चौक और मिंटो रोड की तरफ से गुरु नानक चौक।
सिटी बसें यहां खत्म हो जाएंगी
सिटी बसों को रिंग रोड से नई दिल्ली की ओर जाने नहीं दिया जाएगा। बसें इन बिंदुओं पर खत्म हो जाएंगी। आईएसबीटी-कश्मीरी गेट, आईएसबीटी-सराय काले खां, आश्रम चौक, मूलचंद फ्लाईओवर, विवेकानंद मार्ग (क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय), एम्स, आरटीआर फ्लाईओवर के नीचे, मायापुरी चौक, पंजाबी बाग चौक और आजादपुर चौक।
अतरराज्यीय बसें यहां खत्म हो जाएंगी
बस कहां से आ रही है यहां खत्म होगी
गाजीपुर बॉर्डर आईएसबीटी सराय काले खां
अप्सरा बॉर्डर आईएसबीटी कश्मीरी गेट
चिल्ला बॉर्डर आईएसबीटी सराय काले खां
बदरपुर बॉर्डर आश्रम चौक
टिकरी बॉर्डर पीरागढ़ी चौक
सिंघु बॉर्डर मुबारक चौक
किसी भी बस को रजोकरी बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
एंबुलेंस सहायता नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा
दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सम्मेलन के दौरान एक समर्पित एंबुलेंस सहायता नियंत्रण कक्ष चालू किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान 24 घंटे इसके लिए एक समर्पित मोबाइल नंबर भी चालू रहेगा। शहरभर के प्रमुख जंक्शन पर चिकित्सा आपातकालीन वाहन सहायता दल तैनात किए जाएंगे। मोटरसाइकिल राइडर्स से लेकर मार्शल ग्रीन कॉरिडोर तक का समर्पित दल भी उपलब्ध होगा। सभी संबंधित हितधारकों डीजीएचएस, कैट्स और सभी प्रमुख सरकारी/निजी अस्पतालों के साथ बैठकें की गई हैं ताकि उन्हें उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में बताया जा सके। मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं।