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Delhi-NCR: प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र बिना अक्टूबर से दिल्ली-एनसीआर में नहीं मिलेगा ईंधन, CAQM ने चेताया

Sat, 16 May 2026 01:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक जटिल, बहुक्षेत्रीय चुनौती है।
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दिल्ली में वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने चेतावनी दी है कि दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर से बिना  प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) ईंधन नहीं मिलेगा। आयोग ने दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अन्य उपायों के बारे में भी बात की है। 

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इसी क्रम में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक जटिल, बहुक्षेत्रीय चुनौती है।वे स्वच्छ वायु संवाद के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे, जिसका आयोजन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) संसाधन प्रयोगशाला द्वारा किया गया था, जो आयोग और राहगिरी फाउंडेशन की एक संयुक्त पहल है।
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वर्मा ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में इस चुनौती की जटिलता परिवहन, बायोमास दहन और उद्योगों जैसे कई उत्सर्जन स्रोतों के कारण है। उन्होंने आगे कहा कि सीएक्यूएम एक पारदर्शी, सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां नियामक ढांचे को सार्वजनिक समझ और वैज्ञानिक सहमति से मजबूत किया जाता है। अध्यक्ष ने उन तीन निर्देशों पर भी प्रकाश डाला जिन्हें सीएक्यूएम ने शुक्रवार को अपनी 28वीं पूर्ण बैठक के दौरान अनुमोदित और जारी किया।

पहला निर्देश यह है कि दिल्ली में 1 जनवरी, 2027 से केवल एल5 श्रेणी के इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर का पंजीकरण किया जाएगा। यही निर्देश गुरुग्राम, फरीदाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत में 1 जनवरी, 2028 से और शेष एनसीआर में 1 जनवरी, 2029 से लागू होगा।

दूसरे निर्देश के तहत, इस वर्ष 1 अक्टूबर से, एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) के बिना वाहनों को ईंधन प्रदान नहीं किया जाएगा। तीसरे निर्देश में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को 2026 की फसल के मौसम के दौरान धान की पराली जलाने को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए कठोर कार्य योजनाएं लागू करने का आदेश दिया गया है।

इस कार्यक्रम में सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोडे ने भी अपनी बात रखी। सीएक्यूएम ने कहा कि प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर कड़े क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी प्राथमिकता स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना, बाधाओं की पहचान करना, प्रवर्तन तंत्रों में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि हमारे नियामक ढांचे जनता के लिए ठोस परिणाम दें।

एनसीआर में पराली जलाने की घटनाओं में अचानक वृद्धि की समीक्षा
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की 28वीं पूर्ण बैठक में अप्रैल-मई के दौरान पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में हुई अचानक वृद्धि की समीक्षा की गई और संबंधित राज्य सरकारों एवं एजेंसियों को सख्त प्रवर्तन तंत्र लागू करने का निर्देश दिया गया।

आयोग ने पाया कि 1 अप्रैल से 15 मई के बीच पंजाब में ऐसी 8,986 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2025 में इसी अवधि के दौरान 6,474 मामले दर्ज किए गए थे। एक अधिकारी ने बताया कि हरियाणा में इस अवधि के दौरान 3,290 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 1,503 घटनाएं दर्ज की गई थीं।

बैठक के दौरान, सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी चर्चा की और पूरे क्षेत्र में सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (सीएएक्यूएम) नेटवर्क को मजबूत करने की प्रगति की समीक्षा की।

अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में कुल 46 अतिरिक्त सीएक्यूएम (CAAQM) स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है (दिल्ली में 14, हरियाणा में 16, उत्तर प्रदेश में 15 और राजस्थान में एक), जिससे निगरानी केंद्रों की कुल संख्या 157 हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि आयोग ने एनसीआर राज्यों को शेष केंद्रों की शीघ्र स्थापना पर जोर दिया है।

सीएक्यूएम ने एनसीआर राज्यों और दिल्ली के लिए 2026-27 के लिए निर्धारित हरियाली और वृक्षारोपण लक्ष्यों की भी समीक्षा की और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नियमित अनुवर्ती कार्रवाई और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। पूरे क्षेत्र में 2026-27 के लिए लगभग 4.60 करोड़ पेड़, झाड़ियाँ और बांस के वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
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अधिकारी ने कहा कि सीएक्यूएम ने जारी निर्देशों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को दोहराया और सभी संबंधित एजेंसियों और एनसीआर राज्य सरकारों को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वार्षिक कार्य योजनाओं और क्षेत्रीय कार्यों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समन्वित प्रयास करने का निर्देश दिया। 

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