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माल-भाड़ा बढ़ाए बिना राजस्व में इजाफे पर जोर

Mon, 21 Nov 2016 12:55 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद /अमर उजाला, फरीदाबाद

सार

माल-भाड़ा बढ़ाए बिना राजस्व में इजाफे पर जोर 
यात्री खर्च करने को तैयार, आप सुविधा दें
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रेलवे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेल विकास शिविर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर रेलवे की वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ाने पर रहा। राजस्व बढ़ाने के लिए एक तरफ उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर खर्च घटाने की वकालत की तो यात्रियों को कीमत लेकर सुविधाएं देने की संभावनाएं तलाशने को कहा।
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रेल राज्यमंत्री राजेन गोहेन के मुताबिक प्रधानमंत्री का जोर रेलवे के व्यवसायीकरण और फ्रेट अर्निंग्स पर ज्यादा रहा। गोहेन ने बताया कि मंथन शिविर में प्रधानमंत्री ने राजस्व बढ़ाने के लिए उनके साथ 30 साल पहले की घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 30 साल पहले वह किसी आदिवासी इलाके में गए थे।

वहां बस अड्डे पर दो भील बस के इंतजार में खड़े थे। दो बसें निकल गईं लेकिन भील उनमें नहीं चढ़े। उन्होंने सोचा कि शायद भील कम पढ़े लिखे हैं और बसों के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए दोनों से पूछा कि दो बस निकल गईं, वह बैठे क्यों नहीं।
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भीलों ने जवाब दिया कि वह काली बस का इंतजार कर रहे हैं, वह एक रुपया ज्यादा लेती है लेकिन सबसे पहले पहुंचती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर यात्री रुपया खर्च करने को तैयार है, आप उसे सुविधा दें।

रेल राज्यमंत्री राजेन गोहेन ने बताया कि प्रधानमंत्री ने नॉन पैसेंजर रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर दिया। माल भाड़ा बढ़ाए बिना फ्रेट अर्निंग्स बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने सुझाव भी दिए। अभी तक माल गाड़ी एंड टू एंड यानी एक निश्चित स्टेशन से दूसरे निश्चित स्टेशन तक ही माल ढो कर ले जाती है।

बीच के स्टेशनों पर माल ढुलाई सुविधा नहीं होने से राजस्व कम हो रहा है। इसकी जगह अब स्टेशन से स्टेशन माल ढुलाई करने को कहा। यानी छोटे स्टेशन से भी माल की लदाई और ढुलाई की जाए। यात्री सुविधा और खर्च घटाने के बारे में प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल कर यात्री को घर बैठे टिकट, ट्रेनों के बारे में सटीक जानकारी आदि सुविधाएं देने को कहा।

निचले कर्मचारियों के सुझाव पर अमल करें
मंथन शिविर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रेल चलाने में समस्याएं कहां आ रही हैं यह बात कार्यालय में बैठे अधिकारियों को उतनी अच्छी तरह नहीं मालूम होती जितना जमीन पर काम करने वाले छोटे कर्मचारी को। एक अधिकारी 10-20 चीजों पर नजर रखता है जबकि एक छोटा कर्मचारी सिर्फ उसको देखता है जहां वह लगा है, उस व्यक्ति को समस्या और उसका समाधान भी बेहतर तरीके से मालूम होता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इन छोटे कर्मचारियों के सुझाव लेकर उन पर अमल करें तो अधिकतर समस्याओं का बेहतरीन हल मिलेगा।
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