अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा है कि अपराध से सीधा संबंध न होने पर बैंक खातों को फ्रीज करना ‘ड्रैकोनियन’ (अत्यधिक कठोर) कदम है। एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई को एक व्यक्ति के तीन बैंक खातों को अनफ्रीज करने के निर्देश दिए हैं, जिनका दामाद तीन करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में आरोपी है।
विशेष न्यायाधीश सुषांत चंगोत्रा ने सीबीआई की कार्रवाई को पूरी तरह मनमाना बताते हुए कहा कि जांच को साधारण नागरिकों को परेशान करने का हथियार नहीं बनाया जा सकता, सिर्फ इसलिए कि उनके रिश्तेदार पर कोई संदेह है। गुलशन कुमार ने अपने वकील प्रतीक सोम के जरिए याचिका दायर कर अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने को गैरकानूनी बताते हुए चुनौती दी थी। उनके दामाद पर तीन करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। अदालत ने कहा कि अपराध की जांच को रिश्तेदारों के कारण निर्दोष लोगों को परेशान करने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने सीबीआई से सख्ती से पूछा कि बिना सीधे लिंक के खातों को फ्रीज क्यों किया गया।