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Delhi: मेट्रो में नौकरी के लिए निकले विज्ञापन की आड़ में जालसाजों ने परिवार को बनाया निशाना, लाखों की ठगी

Sat, 31 Aug 2024 07:45 AM IST
विजय पुंडीर राजीव कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर परिवार वालों ने अदालत से गुहार लगाई। चार साल बाद अब अदालत के आदेश के बाद डाबड़ी थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और ठगी का मामला दर्ज किया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चार साल पहले मेट्रो में निकले नौकरी के विज्ञापन के आधार पर जालसाजों ने एक परिवार से लाखों रुपये ठग लिए। आरोपियों ने बेटी को नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया और फर्जी पहचान पत्र, बैच और नियुक्ति पत्र सौंप कर लाखों रुपये ले लिए। सारे दस्तावेज नकली निकलने पर पीड़ित परिवार ने डाबड़ी थाने में इसकी शिकायत की।

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पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर परिवार वालों ने अदालत से गुहार लगाई। चार साल बाद अब अदालत के आदेश के बाद डाबड़ी थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और ठगी का मामला दर्ज किया है। परिवार को उम्मीद है कि पुलिस आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाएगी और उन्हें न्याय मिल पाएगा।

चंचल सपरिवार डाबड़ी इलाके में रहती हैं। इनका बहादुरगढ़ हरियाणा में एक मकान है। उन्होंने बताया कि 2020 में मेट्रो में नौकरी का विज्ञापन निकाला था। बहादुरगढ़ में उसके मकान के पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि कार्तिक नाम का व्यक्ति उनकी बेटी का मेट्रो में नौकरी लगवा सकता है। बहादुरगढ़ में रहने वाले कार्तिक से फोन पर बात करने पर उसने नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया और बताया कि इसके लिए तीन लाख रुपये देने होंगे। चंचल ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर दो लाख रुपये का इंतजाम किया। आठ जनवरी 2020 को कार्तिक दो अन्य लोगों के साथ पीड़िता के घर आया। उसने दोनों को मेट्रो का कर्मचारी बताया। उसके बाद कार्तिक ने मेट्रो के एक फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाया। उसके बाद दो लाख रुपये ले लिए। 
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कार्तिक ने चंचल को बताया कि आपकी बेटी का सत्यापन हो गया है। कुछ दिन बाद मेट्रो का नियुक्ति पत्र मिल जाएगा। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद वह बाकी के एक लाख रुपये लेगा। कुछ दिन बाद पूछताछ करने पर आरोपी ने उनके व्हाट्सएप पर मेट्रो का पहचान पत्र और बैच भेजा। साथ ही लड़की की पुलिस सत्यापन कॉपी भेजने के लिए कहा। उसके बाद उसने अपने एक साथी को भेजकर बाकी की रकम देने के लिए कहा। 

पीड़ित परिवार ने रकम को ऑनलाइन उसके साथी के बैंक खाते में भेज दिया। उसके बाद आरोपी ने उन्हें नियुक्ति पत्र भेजकर लक्ष्मी नगर के एक पते पर जाने के लिए कहा। चंचल अपनी बेटी के साथ उस पते पर पहुंची लेकिन वहां कोई कार्यालय नहीं था। इस बाबत फोन करने पर कार्तिक टाल मटोल करने लगा। बाद में पता चला कि उसके भेजे सारे दस्तावेज नकली हैं।  पीड़ित परिवार ने उसपर पैसे वापस करने का दबाव दिया। उसके बाद आरोपी ने तीन चेक दिए। सभी चेक बाउंस हो गए।

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