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ऑर्गेनिक खेती के नाम पर 80 लाख से अधिक की ठगी, 150 लोगों को शिकार बना कंपनी फरार

Fri, 30 Aug 2019 01:51 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा

सार

  • ऑर्गेनिक खेती के नाम पर 80 लाख से अधिक की ठगी
  • कंपनी के सीईओ व दो डायरेक्टरों पर मामला दर्ज, गिरफ्तार
  • 55 हजार निवेश कराकर 300 दिन तक 468 रुपये देने का किया था वादा
  • 150 से लोगों को शिकार बनाकर कंपनी फरार हो गई
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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ऑर्गेनिक खेती के नाम पर निवेश कराकर 80 लाख रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सेक्टर-18 में कंपनी का दफ्तर खोलकर करीब 150 लोगों से ठगी की गई है। कंपनी की तरफ से 55 हजार रुपये का निवेश कराकर 300 दिन तक प्रति दिन 468 रुपये देने की योजना निवेशकों को बताई गई थी। कुछ दिन तक पैसे लौटाने के बाद आरोपी दफ्तर बंद कर भाग गए। इसके बाद कोतवाली सेक्टर-20 में कंपनी के सीईओ व दो डायरेक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।

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पुलिस के मुताबिक, गोकुल बसंल, अनिल शर्मा और प्रमोद वर्मा ने मिलकर एक जनवरी को सेक्टर-18 के चोखानी टावर में माई ग्रो लाइफ नामक कंपनी का दफ्तर खोला था। गोकुल इस कंपनी का सीईओ और अनिल व प्रमोद डायरेक्टर थे। मास्टरमाइंड अनिल शर्मा झोलाछाप डॉक्टर रह चुका है। तीनों ने मिलकर एक पोंजी स्कीम बनाई। इसके तहत निवेशक को 55 हजार रुपये एकमुश्त निवेश करने थे। इसके एवज में 468 रुपये 300 दिन तक वापस दिए जाने थे यानी लगभग तीन गुना रकम निवेशकों को वापस करने का लालच दिया गया था। तीनों आरोपियों ने विज्ञापन, मोबाइल आदि से संपर्क बनाकर लोगों के पैसे निवेश करा लिए और कुछ दिन तक पैसे लौटाए, लेकिन बाद में कंपनी दफ्तर बंदकर भाग गई। निवेशकों ने जब कंपनी के सीईओ व डायरेक्टरों से संपर्क किया तो जान से मारने की धमकी दी गई।

दो मुकदमे दर्ज
मामले में कोतवाली सेक्टर-20 में तीनों के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सेक्टर-18 चौकी प्रभारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले में 15 लोगों ने और लिखित शिकायत की है। कई लोगों ने फोन पर भी संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि अभी तक की जांच में यह पता लगा है कि 150 से लोगों से ठगी की गई है।
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चार महीने में भाग गई कंपनी
माई ग्रो लाइफ कंपनी का तामझाम के साथ उद्घाटन किया गया था। इसके बाद इसका प्रचार-प्रसार भी जोर-शोर से किया गया। जनवरी, फरवरी व मार्च महीने में निवेशकों को इकट्ठा किया गया और योजना बताकर विश्वास जीत लिया गया। मार्च व अप्रैल महीने में 10 से 21 दिनों तक प्रतिदिन के हिसाब से पैसे दिए गए। इसके बाद अप्रैल में कंपनी का दफ्तर बंद हो गया और सीईओ व डायरेक्टर भाग गए।

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