सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2021-2022 के दौरान यह फर्जीवाड़ा किया गया। इस दौरान डॉ. दास तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के ओएसडी थे। वर्तमान में वह स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज के ओएसडी हैं। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि एक बार इस्तेमाल करने वाले दस्ताने, एन 95 मास्क और एक अन्य तरह के दस्तानों की खरीद में फर्जीवाड़ा किया गया है।
उपकरणों को खरीदने के लिए तीन कमेटियां बनी, जिसके चेयरमैन डॉ. आरएन दास थे। आरोप है कि जिन कंपनियों को उपकरण सप्लाई करने के लिए टेंडर दिए गए, वह नियमों पर खरी नहीं उतर रही थी। निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए कई बार टेंडर रद्द किए गए। उक्त तीन मेडिकल उपकरणों के अलावा रैपिड एंटीजन किट के खरीद में भी फर्जीवाड़ा पाया गया है। इसमें 238 करोड़ से अधिक का भुगतान अलग-अलग कंपनियों को किया गया है।
पांच कंपनियों के बीच घूम रही मेडिकल उपकरणों की खरीद
सतर्कता निदेशालय की जांच में पता चला है कि मेडिकल उपकरण खरीद का मामला पांच कंपनियों के बीच घूम रही है। इसमें तिरुपति मेडलाइसं प्राइवेट लिमिटेड, बृज टेक्सटाइल्स, फर्मा सर्ज इंपेक्स, ईआईसी एएसएच प्राइवेट लिमिटेड और एसडी बायोसेंसर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों को मेडिकल उपकरण खरीद में करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है।