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रिटायर अफसरों को निशाना बना रहे ठग, मोटा लाभ दिलाने का झांसा देकर बिछाते हैं जाल

Mon, 23 Sep 2019 06:27 AM IST
Trainee Trainee धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली़
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डेमो - फोटो : डेमो
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राजधानी में जालसाजों व ठगों का ऐसा गिरोह काम कर रहा है जो ऊंचे पदों से रिटायर अधिकारियों को निशाना बना रहा है। उन्हें बीमा का मोटा लाभ दिलाने का झांसा देकर ठगी की जाती है। ताजा मामला भारतीय सेना से रिटायर कर्नल जीए खान से जुड़ा है।
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पूर्व में दिल्ली सरकार से रिटायर सचिव स्तर के अधिकारी रमेश शर्मा भी इनके निशाने पर आ चुके हैं। 2015 में सामने आए इस मामले में दिल्ली पुलिस ने करीब 20 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन अब तक सिर्फ तीन शातिरों को गिरफ्तार किया जा सका है और उन्हें भी कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

ताजा मामले में सेना से रिटायर कर्नल जीएम खान ने बताया कि उनके साथ 1.02 करोड़ रुपये की ठगी की गई। उन्हें फोन पर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (एजीआईएफ) में उनके बीमा संबंधी कई अहम जानकारियां दी गईं। इसके बाद 30-40 लाख रुपये का फायदा होने का झांसा दिया गया।
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झांसे में आने पर उन्होंने एक करोड़ से ज्यादा धनराशि ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दी। बाद में शक होने पर एजीआईएफ में जांच की और ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन ठग अभी पुलिस की गिरफ्तार से दूर हैं।

पुराने केस में आरोपी को जमानत

पूर्व में सामने आए मामले में पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम मनीष खुराना ने सुदेश कुमार बिधूड़ी को एक लाख रुपये के निजी व एक लाख रुपये के जमानती मुचलके पर जमानत प्रदान की है। उसे दिल्ली पुलिस ने आर्थिक अपराध शाखा की सितंबर 2015 में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।

इससे पहले मुख्य आरोपी रवि को 13 सितंबर 2018 को जमानत मिल गई थी। कोर्ट के समक्ष दिल्ली सरकार से रिटायर अधिकारी रमेश शर्मा ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें 7.92 लाख रुपये का चूना लगाया गया था। उनके जैसे सैकड़ों लोगों से यह गिरोह ठगी कर चुका है।

ऐसे बिछाते हैं जाल

सूत्रों की माने तो ठगों का यह गिरोह रिटायर हो चुके लोगों की बंद पड़ी पॉलिसी का विवरण पैसा देकर निकलवाते हैं और उसका इस्तेमाल अपने शिकार को फंसाने में करते हैं। इसके लिए यह ठग कंपनी खोलकर कॉल सेंटर चलाते हैं। इन कंपनियों से कॉल कर पीड़ित को उसकी पॉलिसी से संबंधित अहम जानकारियां दी जाती हैं ताकि वह शख्स इनके झांसे में आ जाए।

एलआईसी अधिकारी ने 2015 में कराई थी एफआईआर

भारतीय जीवन बीमा निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक टीसी सुशील कुमार ने अक्तूबर 2015 में पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत देकर कहा था कि यह ठग बंद पड़ी पॉलिसी को सरेंडर करने के एवज में मोटे फायदे, मुफ्त उपहार का लालच देते थे। इसके लिए कैश या चेक से राशि लेते थे और गायब हो जाते थे।

दिल्ली पुलिस ने सुशील कुमार की शिकायत पर वैल्यू एड ऑन सिक्योरिटीज, द विजन लॉयल्टी एडीशन, डेविस क्लब नाम की कई कंपनियों को नामजद किया था। एक कंपनी का नाम तो एलआईसी के नाम पर ही रखा हुआ था।
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