बिजली निगम के सब-डिवीजन नंबर-दो से निलंबित किए गए तीन कर्मचारी वर्ष 2010 से कैश में गड़बड़ी कर रहे थे। शनिवार को मुख्यालय की ऑडिट टीम ने इस बात को स्पष्ट किया। टीम ने कहा कि आंकड़ों की पूरी जांच प्रक्रिया तक कर्मचारियों से कोई सेवा नहीं ली जा सकती।
ऑडिट टीम ने दूसरे दिन भी यहां पर खातों की जांच पड़ताल की। सुबह से लेकर दोपहर तक चली जांच में टीम ने पाया कि तीनों कर्मचारी चार साल से बिजली निगम को चूना लगा रहे थे। आरोप है कि उपभोक्ता इन्हें जो रकम या चेक जमा करवाने के लिए देते थे वह किसी न किसी तरह से हड़प रहे थे।
तथ्य सामने आने के बाद टीम ने डिवीजन के अकाउंट्स विंग के कर्मचारियों को भी तलब किया। टीम ने उनसे पूछा कि किस-किस उपभोक्ता द्वारा नियमित तौर पर बैक के जरिए बिजली का भुगतान किया जाता रहा।
टीम के अनुसार डिवीजन की बैकिंग का काम (बिजली बिलों का चेक से भुगतान) एनआईटी स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में होता है। बिजली निगम के बैकिंग खातों में राशि का मिलान एक जैसा नहीं है। इसकी एक शिकायत ऑडिट टीम के पास भी आई है। जिसके आधार पर जांच पड़ताल की जा रही है।
एनआईटी के एक्सईएन राम निवास ने बताया कि टीम द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जो जानकारी उनके पास उपलब्ध है वह टीम को मुहैया करवाई जा रही है। जो कार्रवाई हो रही है इस पर वह अधिकारियों से बात करेंगे। जिसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।