शनिवार रात को ही करीब साढ़े नौ बजे बिस्तर का प्रबंध होने के बाद डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती कराया, लेकिन करीब तीन घंटे बाद काव्या ने दम तोड़ दिया। चमन सिंह का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और समय पर बिस्तर न मिलने के कारण उनकी बच्ची की मौत हुई है। वहीं इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने भी कोई जवाब नहीं दिया है।
इस तरह का मामला ये कोई नया नहीं है। इसी साल फरवरी और सितंबर माह में भी चाचा नेहरू अस्पताल में आईसीयू बिस्तर की कमी के कारण समय पर बच्चों को इलाज न मिलने के कारण दो की मौत हुई थी।
ये सिलसिला कई वर्ष से जारी है। वर्ष 2016 में भी आईसीयू बिस्तर कम होने और बच्चे की मौत के बाद यहां हंगामा, मारपीट और हड़ताल तक हुई। इसके बावजूद हालातों में अभी भी सुधार नहीं है।