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वो चार गलतियां, जिनके चलते हुआ चिड़ियाघर हादसा

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दिल्ली चिड़ियाघर में मंगलवार को एक बेहद ही दर्दनाक और दिल दहलाने वाली घटना हुई। एक सफेद बाघ ने मकसूद (20) नाम के एक युवक को मार डाला। चिड़ियाघर में घूमने के लिए आया युवक सफेद बाघ को नजदीक से देखने की कोशिश करते समय बाड़े में गिर गया था।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाघ युवक को गर्दन से पकड़कर करीब 10 मिनट तक घसीटता रहा, लेकिन चिड़ियाघर प्रशासन उसे बचाने में नाकाम रहा। चिड़ियाघर प्रशासन ने इसे लापरवाही का मामला बताते हुए कहा कि युवक खुद बाड़े में कूदा। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया।

बाड़े में बाघ के हमले से युवक की मौत के बाद चिड़ियाघर प्रशासन की दर्शकों के प्रति सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। इस हादसे ने सुरक्षा तैयारियों के सभी दावों की पोल खोल दी है।
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जानिए वो चार बड़ी गलतियां जिनके चलते एक निर्दोष लड़के की जान चली गई।

पहली गलती: तमाशबीन बने रहे गार्ड

युवक के बाड़े में गिरने से लेकर बाघ के हमले से बचाने तक सभी मोर्चे पर प्रशासन सिर्फ तमाशबीन बना रहा। जानकार इसे चिड़ियाघर प्रशासन की लापरवाही बता रहे है। उनके मुताबिक अगर गार्ड अपनी ड्यूटी करता तो यह हादसा ही नहीं होता।

दरअसल, पहला सवाल यह उठता है कि जब युवक पहले बैरीकेड को पार करके बाड़े की दीवार तक पहुंचा। उस समय गार्ड कहां थे। चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि वहां गार्ड थे। उस युवक को मना भी किया गया था।

मगर सवाल यह उठता है कि अगर युवक बाड़े की दीवार तक पहुंचने की कोशिश में था तो गार्ड्स ने उसपर नजर क्यों नहीं रखी। यही नहीं, लड़के के बाड़े में गिरने के बाद भी गार्ड तमाशा देखते रहे। अगर वह समय पर चिड़ियाघर प्रशासन और पुलिस को सूचना देते तो लड़के की जान बचाई जा सकती थी।

दूसरी गलती: बाड़े में नहीं था पानी

एक सवाल यह भी उठता है कि सभी ऐसे जानवरों के बाड़े में आगे की तरफ पानी होना चाहिए। मगर बाघ के बाड़े में पिछले कुछ समय से पानी नहीं है। जिससे युवक जब बाड़े में गिरा तो बाघ उस तक बेहद आसानी से पहुंच गया।

पानी नहीं होने की वजह से बाघ ने सीधे युवक पर हमला बोल दिया। हालांकि चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि बाड़े में पानी होता है लेकिन दो तीन दिन पहले पानी के गंदे होने की शिकायत की इसलिए सफाई के कारण पानी निकाला गया था।

अगर बाड़े में बागे की तरफ पानी होता तो भी लड़के की जान बच सकती थी।

तीसरी गलती: गार्डों को नहीं दी गई कोई ट्रेनिंग

सबसे बड़ी बात ये है कि चिड़ियाघर के गार्डों को ऐसे खतरों से निपटने की कोई ट्रेनिंग नहीं दी जाती। खतरनाक जानवरों की देखरेख करने वाले गार्डों और दूसरे स्टाफ को जरूरी ट्रनिंग दी जाए तो ऐसे खतरों से बचा जा सकता है।

प्रत्यक्ष दर्शियों के मुताबिक लड़का जब बाड़े में गिरा तो पहले बाघ खामोश था लेकिन आसपास हो रहे शोर और ऊपर से पत्‍थर फेंकने के चलते बाघ का गुस्सा भड़क गया और उसने लड़के पर हमला बोल दिया।

अगर वहां मौजूद गार्ड, लोगों को तुरंत हटा देता तो बाघ को भड़कने से रोका जा सकता था। क्योंकि तुरंत युवक पर हमला नहीं किया। जब उसे ऊपर से पत्थर मारा गया तब उसने हमला किया। अगर समय रहते भीड़ हटाकर बाघ को हटाने की कोशिश की जाती तो शायद उसकी जान बच जाती।
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चौथी गलती: नहीं था बेहोश करने वाला इंजेक्‍शन

चिड़ियाघर में मौजूद एक चश्मदीद के मुताबिक जब युवक बाड़े में गिरा, तो वह डरकर दीवार के पास ही बैठ गया, तभी एक बाघ उसके पास आया। युवक के हाथ जोड़कर बैठ जाने पर बाघ करीब पांच मिनट तक उसके पास शांत होकर खड़ा रहा।

इस दौरान सुरक्षाकर्मी व अन्य लोग वहां आ गए। शोर मचाने के साथ बाघ को पत्थर मारकर भगाने की कोशिश की गई। इसके बाद बाघ ने मकसूद को पंजा मारा और उसे गर्दन से पकड़कर पूरे बाड़े में 10 मिनट तक घसीटता रहा। इस दौरान चिड़ियाघर प्रशासन ने युवक को बचाने की कोशिश नहीं की।

सिर्फ गार्ड व कुछ कर्मी सूचना को आगे फ्लैश करने में लगे रहे। चश्मदीदों ने बताया कि बाघ के हमले से युवक के शरीर पर कपड़ा न के बराबर बचा था। करीब 10 मिनट बाद जब चिड़ियाघर प्रशासन ने गेट पीटकर व तेज आवाज की तो बाघ युवक को छोड़कर पिंजरे की ओर भाग गया। तब तक मकसूद की मौत हो चुकी थी।

अगर वहां मौजूद सुरक्षा गार्डों के पास बाघ को बेहोश करने का इंजेक्‍शन होता तो भी उस लड़के को बचाया जा सकता था।
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