एसीजेएम कोर्ट ने भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को दो मामलों में जमानत दे दी। चंद्रशेखर को कोर्ट ने दोनों मामलों में बी वारंट पर तलब किया था। शुक्रवार को चंद्रशेखर को दिल्ली जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच लाकर एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।
इस दौरान उनके सैकड़ों समर्थक कोर्ट पहुंचे। चंद्रशेखर के अधिवक्ताओं ने जमानत दिलाने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।द चंद्रशेखर को दिल्ली में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने के विरोध में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता व पूर्व शासकीय अधिवक्ता जयवीर सिंह ने बताया कि इंदिरापुरम थाने में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी कि चंद्रशेखर अपने साथियों के साथ कई गाड़ियों में 21 जून 2019 को कनावनी गांव आ रहे थे।
इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने कनावनी पुलिया के पास उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने गाड़ी गलत तरीके से लगाकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया था। यहां चंद्रशेखर जुमे की नमाज अदा होने के बाद एक विशेष समुदाय के लोगों से मिलने के लिए आ रहे थे।
पुलिस ने गुलजार और दीपक समेत 20 अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले के जांच अधिकारी सुचिता चौधरी ने एक गवाह के बयान के आधार पर भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर के खिलाफ कोर्ट से बी वारंट जारी कर दिया था।
बी वारंट के आधार पर चंद्रशेखर को शुक्रवार को एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान चंद्रशेखर के वकीलों ने उसे जमानत दिलाने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जमानत स्वीकार कर ली।
दूसरे मामले में 15 नवंबर 2018 को भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर साहिबाबाद क्षेत्र की वृंदा गार्डन कॉलोनी में एक सगाई समारोह में शामिल होने आए थे।
इसी दौरान एक धर्मेंद्र ने उसने पूछा की आपको हथियार बंद लोगों की क्या जरूरत हैं। इस पर चंद्रशेखर के एक साथी ने धर्मेंद्र को थप्पड़ मार दिया। धर्मेंद्र ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए चंद्रशेखर समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।