केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को ने देश के सबसे बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की नींव रखी। 564 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) क्षमता वाले इस प्लांट का निर्माण ओखला में किया जा रहा है।
इसके तैयार होने के बाद पुराने चार प्लांट बंद कर दिए जाएंगे। शेखावत ने इस मौके पर जल आंदोलन को जनांदोलन बनाने की अपील की। वहीं, केजरीवाल ने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए धन्यवाद कहा। साथ ही उम्मीद जताई कि दोनों सरकारें मिलकर यमुना नदी को अविरल व निर्मल बनाएंगी।
इस अवसर पर शेखावत ने कहा कि पानी की कमी चिंता का विषय है। जल संकट से निपटने के लिए वाटर हार्वेस्टिग और ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर जोर देना जरूरी है। शेखावत के मुताबिक एसटीपी से शोधित जल के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की जरूरत है।
प्लांट से निकलने वाले पानी का सही इस्तेमाल करके बदलाव ला सकते हैं। केजरीवाल की तारीफ करते हुए शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यमुना में पानी संचय की बड़ी योजना अपने हाथ में ली है।
दूसरी तरफ प्लांट लगाने में सहयोग के लिए केजरीवाल ने केंद्र का धन्यवाद दिया। साथ ही भरोसा जताया कि दोनों सरकारें मिलकर यमुना नदी को स्वच्छ करने में कामयाब होंगी। केजरीवाल ने यमुना नदी के बारिश के पानी के संचय की योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भी केंद्र सरकार की तरह से सहयोग मिल रहा है।
शोधित जल के इस्तेमाल का केजरीवाल ने दिया विकल्प:
केजरीवाल ने बताया कि एसटीपी में रोजाना 564 एमएलडी गंदा पानी शोधित होगा। लेकिन शोधित जल के इस्तेमाल की अभी ठोस योजना नहीं है। इंजीनियर इस पानी का यमुना नदी में डालने की बात कर रहे हैं। लेकिन इसे बर्बाद नहीं कर सकते। केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा के बॉर्डर वाले इलाकों में सिंचाई के पानी की बहुत दिक्कत है।
यहां से शोधित पानी सिंचाई के लिए बहुत अच्छा है। अगर यहां से निकलने वाला रोजाना 564 एमएलडी पानी हरियाणा को दे दें तो वहां ये सिंचाई के लिए इस्तेमाल हो सकता है। बदले में इतना ही पानी हरियाणा दिल्ली को दे दे।
देश का सबसे बड़ा प्लांट एक नजर में:
. ओखला सीवेज ट्रीटमेंट कांप्लेक्स में फिलहाल चल रहे हैं 6 एसटीपी।
. फेज-1 एसटीपी 1937 में हुआ था तैयार, फेज-दो से चार भी बने 1982-1993 के बीच।
. चारों फेज की क्षमता 564 एमएडी, लेकिन इनकी उम्र हो चुकी पूरी।
. यहां से शोधित पानी का बीओडी रहता 30 मिलीग्राम प्रति लीटर व टीएसएस 50 मिलीग्राम प्रति लीटर।
. इन्हें हटाने के लिए 564 एमएलडी क्षमता का बन रहा नया प्लांट।
. नए प्लांट के शोधित पानी का बीओडी व टीएसएस होगा 10 मिलीग्राम प्रति लीटर, नाइट्रोजन व फास्फोरस की मात्रा भी होगी शून्य।
. नए प्लांट की शोधन क्षमता व बॉयोगैस से बनने वाली बिजली की हो सकेगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग।
. निर्माण पर 85 फीसदी खर्च केंद्र सरकार करेगी। यमुना एक्शन प्लान-तीन के तहत जापानी एजेंसी से लेगी लोन। बाकी 15 फीसदी का खर्च का जिम्मा होगा दिल्ली सरकार पर।