जनता पार्टी से पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से 1977 में सांसद बने किशोर लाल मानते हैं कि आज चुनाव में अनाप शनाप पैसे खर्च किए जाते हैं। उनके समय में चुनाव पार्टी के सदस्यों के चंदे पर लड़ा जाता था। हर एक सदस्य चार आने चंदा जमा करता था। बूथ लेवल पर चंदा जमा करने के बाद एक-एक पैसे का हिसाब होता था। सभी राजनीतिक दलों का ऐसा ही हिसाब-किताब होता था।
उन्होंने कहा कि दलों की विचारधारा अलग होती थी, लेकिन सोच सभी की जनता की भलाई करना ही होती थी। इमरजेंसी के दौरान किशोर लाल ने कांग्रेस छोड़कर जनता पार्टी ज्वाइन की और अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता एचकेएल भगत को हरा दिया। घर-घर जाकर एक-एक परिवार से मिलकर वोट मांगा। मंदिरों-गुरुद्वारों और पार्टी कार्यकर्ताओं के घरों पर चुनाव की बैठक की गई। तब बड़ी-बड़ी जनसभाएं नहीं होती थीं। पांच हजार रुपये भी खर्च नहीं किए और चुनाव जीत गए। किशोर लाल 1956-1977 तक निगम के सदस्य रहे। 1962-1975 तक निगम में नेता विपक्ष और 1969-75 में स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य रहे। 1962-75 के दौरान डीडीए के सदस्य रहे। वह कई ट्रेड यूनियनों का नेतृत्व भी किया।