बाबा हरिदास नगर थाना पुलिस ने शातिर बदमाश रवि शौकीन उर्फ चूजा को गुड़गांव से गिरफ्तार कर लिया। रवि नजफगढ़ के पूर्व विधायक भरत सिंह उर्फ भरते की हत्या के मामले में वांछित था।
विज्ञापन
उसने इस मामले में मुख्य गवाह विपिन चौधरी की भी जापानी पार्क, रोहिणीके पास ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। रवि उदयवीर काला गिरोह का सदस्य है। आरोपी के पास से पिस्टल व पांच कारतूस बरामद किए गए।
पुलिस के मुताबिक इंस्पेक्टर शीलबंत को सूचना मिली थी कि रवि सीएनजी पंप, राजीव चौक, गुड़गांव आएगा और कोई बड़ा अपराध करने की फिराक में है। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। वह किशन पहलवान के खास व्यक्ति की हत्या की साजिश रच रहा था।
विज्ञापन
50 हजार रुपए का नामी बदमाश गिरफ्तार
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त आरए संजीव के अनुसार उदयवीर काला के आठ शार्प शूटरों ने 29 मार्च की शाम करीब 7:30 बजे नजफगढ़ स्थित अभिनंदन वाटिका में आयोजित सामाजिक समारोह में पहुंचे पूर्व विधायक भरत सिंह की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी।
पुलिस ने उदयवीर काला समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने इस मामले में रवि शौकीन को भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने रवि पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।
रवि ने उदयवीर काला केभतीजे हेमंत, राकेश और सोनू पंजाबी के साथ मिलकर आठ दिसंबर को जापानी पार्क, रोहिणी में भरत सिंह की हत्या के मुख्य गवाह विपिन चौधरी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर उसकी हत्या कर दी थी।
हेमंत के कहने पर एक युवती ने विपिन से दोस्ती की थी। युवती ही विपिन को जापानी पार्क बुलाकर लाई थी। यहां पर रवि शौकीन व उसकेसाथी घात लगाए बैठे थे।
दोस्ती के लिए दिया हेमंत का साथ
दिचाऊ कलां गांव, नजफगढ़ निवासी रवि शौकीन (22) इग्नू से बीए कर रहा है और तृतीय वर्ष का छात्र है। स्कूल के समय से ही उसकी हेमंत से अच्छी दोस्ती थी। हेमंत पिता और दादा की मौत का बदला किशन पहलवान व भरत सिंह से लेने की बात रवि से कहता रहता था।
वह हेमंत के साथ सहानुभूति रखता था। इस वजह से रवि ने उसका साथ दिया और भरत सिंह की हत्या की साजिश में शामिल हो गया। भरत सिंह की हत्या केबाद ये हरियाणा, पंजाब और उत्तरप्रदेश में छिपता रहा। फरारी के दौरान वह मोबाइल का भी प्रयोग नहीं करता था।
गैंगवार की शुरुआत वर्ष 2002 में शुरू हुई थी। भरत सिंह केभाई और गैंगस्टर रहे किशन पहलवान ने उदयवीर काला के पिता सूरजमल, उसके भाई सुखवीर सिंह और चाचा नारायण सिंह की पालदा राय गांव, सोनीपत में उस समय हत्या कर दी थी, जब वह शादी समारोह में जा रहे थे।
2009 में उदयवीर ने तीन लोगों से सरकार से आवंटित तीन एकड़ जमीन खरीदी थी। भरत सिंह के कहने पर ये सौदा बिगड़ गया था। एक पार्टी ने उदयवीर के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया था।
2009 के विधानसभा चुनाव में भरत सिंह ने उदयवीर का साथ लेने की कोशिश की थी। उदयवीर ने विपक्षी उम्मीदवार को समर्थन किया था। किशन पहलवान व भरत सिंह से बदला लेने के लिए उदयवीर काला ने गिरोह बनाया। वर्ष 2012 में उदयवीर झारौदा कलां गांव के दो भाइयों-विक्की व कुलदीप से मिला।
इन लोगों की भी भरत सिंह से दुश्मनी थी। भरत सिंह ने इनकी बुआ के साथ बदतमीजी की थी और थप्पड़ मार दिया था। उदयवीर ने विक्की, कुलदीप, सतीश, वीरेंद्र उर्फ भोलू, नवीन, रविंद्र उर्फ मीनू, राजेंद्र और पदम डागर के साथ मिलकर 2 जून, 2012 में भरत सिंह पर हमला किया, मगर वह बच गया था।
अब उदयवीर काला का भतीजा हेमंत बड़ा हो गया और उसने भरत सिंह व किशन पहलवान से बदला लेने की ठानी। हेमंत ने हथियारों का प्रबंध किया था और साथियों के साथ मिलकर भरतसिंह की हत्या कर दी थी।