पटियाला हाउस कोर्ट ने रैश ड्राइविंग के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल अविश्वसनीय गवाही के आधार पर किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने 15 वर्ष पुराने सड़क हादसे के मामले में पूर्व डीटीसी बस चालक श्याम सुंदर को रैश और लापरवाह ड्राइविंग के आरोपों से बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने श्याम सुंदर की अपील स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के दोषसिद्धि के फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा और मामले में प्रस्तुत गवाहों की गवाही भरोसेमंद नहीं है। मजिस्ट्रेट अदालत ने मई 2025 में श्याम सुंदर को आईपीसी की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत) और धारा 279 (रैश एवं लापरवाह ड्राइविंग) के तहत दोषी ठहराते हुए 18 महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।
अभियोजन के अनुसार, 25 अक्तूबर 2011 को शंकर रोड पर डीटीसी बस चलाते समय कथित लापरवाही के कारण चंद्रावती नामक महिला की मौत हो गई थी। अदालत ने गवाहों की गवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में उचित सबूतों का अभाव है।