विशेष सीबीआई अदालत ने रिश्वत मांगने में दिल्ली नगर निगम के पूर्व निदेशक एमएस केन को दोषी करार दिया है। केन पर 1997 में कालकाजी इलाके में अवैध निर्माण न तोड़ने के लिए 50,000 रुपये घूस मांगने और 15,000 रुपये लेने का आरोप है।
तीस हजारी स्थित विशेष सीबीआई जज अजय कुमार कुहार ने एमसीडी की झुग्गी-झोपड़ी और स्लम विभाग के तत्कालीन निदेशक केन को दोषी ठहराते हुए कहा कि बिल्डरों और सरकारी अधिकारियों के गठजोड़ के बिना अवैध निर्माण नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों ने अफसरों की मदद से शहर में कुकुरमुत्ते की तरह कंक्रीट के ढांचे खड़े दिए हैं।
कोर्ट ने यह टिप्पणी कालकाजी निवासी संजीव सिंह द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई के बाद की है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि केन ने उनके इलाके में संजीव सिंह और उसके पड़ोसियों द्वारा किए गए अवैध निर्माण को नहीं तोड़ने के लिए घूस मांगी थी।
अदालत ने अवैध निर्माण करने के लिए संजीव को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर केन सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को नहीं रोकने का दोषी है तो संजीव और दूसरे लोग भवन निर्माण नियमों का तोड़ने के लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं। अदालत ने दिल्ली शहरी आश्रय विकास सुधार बोर्ड (ड्यूसिब) के निदेशक को संजीव की बिल्डिंग के अलावा दूसरे भवनों में अवैध निर्माण के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
अभियोजन के मुताबिक, संजीव ने 26 अप्रैल, 1997 को केन के खिलाफ सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत दी थी। उसका आरोप था कि केन ने उन लोगों की बिल्डिंग में हुए अवैध निर्माण को नहीं गिराने के लिए 50,000 रुपये रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने संजीव सिंह से 15,000 रुपये घूस लेते हुए केन को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था।