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Delhi: '...तो इसलिए दिल्ली में विधानसभा चुनाव हार गई आप', केजरीवाल के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण ने बताई वजह

Sun, 09 Feb 2025 05:55 PM IST
श्याम जी. न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण ने एक्स पर लिखा, 'अरविंद केजरीवाल ने अपने लिए 45 करोड़ का शीश महल बनवाया और लक्जरी कारों में यात्रा करना शुरू कर दिया। उन्हें लगा कि राजनीति झांसे और प्रचार से की जा सकती है। यह आम आदमी पार्टी के अंत की शुरुआत है।'
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अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली में भाजपा का 26 साल का वनवास समाप्त हो चुका है। प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा ने राजधानी में वापसी की है। बीते 10 साल से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी का किला ढह गया। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सरकार में नंबर दो रहे पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत कई मंत्री और पार्टी के दिग्गज नेताओं ने अपनी सीट गंवाई। वहीं सीएम आतिशी हारते-हारते जीतीं हैं। आम आदमी पार्टी के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण ने एक्स पर एक पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने हार के पीछे के कुछ कारण बताए।  

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अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी वकील प्रशांत भूषण ने एक्स पर लिखा, 'आप की दिल्ली हार के लिए केजरीवाल काफी हद तक जिम्मेदार हैं। वैकल्पिक राजनीति के लिए बनाई गई एक पार्टी, जिसे पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक माना जाता था, उस पार्टी को अरविंद ने तुरंत एक सुप्रीमो प्रभुत्व वाली, गैर पारदर्शी और भ्रष्ट पार्टी में बदल दिया। लोकपाल का पालन नहीं किया और अपना लोकपाल हटा दिया।'
 

'45 करोड़ का शीश महल बनवाया' 
उन्होंने अपने लिए 45 करोड़ का शीश महल बनवाया और लक्जरी कारों में यात्रा करना शुरू कर दिया। उन्होंने आप द्वारा गठित विशेषज्ञ समितियों की 33 विस्तृत नीति रिपोर्टों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि समय आने पर पार्टी समीचीन नीतियां अपनाएगी। उन्हें लगा कि राजनीति झांसे और प्रचार से की जा सकती है। यह आम आदमी पार्टी के अंत की शुरुआत है।' 

मुस्लिमों का समर्थन ही पर्याप्त नहीं
दिल्ली चुनाव में भाजपा ने हिंदुत्व पर अधिक जोर नहीं दिया, तो मुसलमानों को आकर्षित करने की भी कोशिश नहीं की। नतीजों से लगता है कि मुस्लिमों ने आप के नरम हिंदुत्व को नजरअंदाज किया और भाजपा को भी वोट दिया। लेकिन आप या किसी भी पार्टी के लिए दिल्ली में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ मुसलमानों का समर्थन ही पर्याप्त नहीं है। 

आप का सत्ता विरोधी लहर को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
सत्ता विरोधी लहर के कारण 2024 चुनावों के लिए सुपर ईयर था। मतदाताओं के असंतोष के कारण ब्रिटेन से अमेरिका तक कई देशों में सत्तारूढ़ दलों का पतन हुआ है। लगातार दस साल में सत्ता पर काबिज आप इसे समझ नहीं सकी। उसे यमुना की सफाई, यूरोपियन स्टैंडर्ड की सड़कें और 24 घंटे साफ पानी जैसे वादे पूरे न करना भारी पड़ा। मतदान के ऐन मौके पर जहरीली यमुना का दांव भी उल्टा पड़ गया।

संघ का समर्थन भाजपा का असली पावरबैंक, 5,000 से अधिक बैठकें
आम चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संघ-भाजपा के बीच समन्वय की कमी की बातें सामने आईं। लेकिन संघ ने हरियाणा व महाराष्ट्र में भाजपा का पूरा साथ देकर साबित कर दिया कि संघ असली पावरबैंक है। संघ कार्यकर्ताओं ने 5,000 से अधिक नुक्कड़ और ड्राइंग रूम बैठकें कीं। संघ पार्टी को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने वादों को अनुकूलित करने वाले हाइपरलोकल अभियान लाने में मदद करता है। 
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मुफ्त रेवड़ियां जरूरी, पर जीत के लिए काफी नहीं
नतीजों ने साबित कर दिया-मुफ्त रेवड़ियां चुनाव जीतने के लिए जरूरी हो सकती हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं। महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली, तीनों चुनावों में राज्य सरकारों के कल्याणकारी कार्यक्रमों पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया। इन मुफ्त रेवड़ियों ने महाराष्ट्र और झारखंड सरकारों को सत्ता वापसी मदद की, लेकिन दिल्ली में यह विफल रहा। इससे पहले, बीआरएस और वाईएसआरसीपी भी मुफ्त रेवड़ियों पर दांव लगाने के बावजूद हार गई थी।
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