आरक्षण का उद्देश्य
उपराज्यपाल ने कहा कि सभी योग्य पूर्व-अग्निवीरों के लिए भर्ती खुली रहेगी। इससे उन्हें समान अवसर मिल सकेंगे। यह देश के लिए उनकी सेवा को मान्यता देने का एक तरीका है। यह कदम उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए उठाया गया है।
क्रियान्वयन की समय-सीमा
सभी संबंधित विभागों के लिए भर्ती नियमों में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इन जरूरी बदलावों को पूरा करने की समय-सीमा 30 जून तय की गई है। विभागों को इन भर्ती किए गए लोगों की विशेष क्षमताओं का उपयोग करने का अधिकार होगा। यह उपयोग उनकी ऑपरेशनल आवश्यकताओं के अनुसार किया जाएगा।
अग्निवीर देश के लिए क्यों हैं खास
-अग्निवीरों को भारतीय सेना में चार साल के लिए भर्ती, आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण और वास्तविक सेवा का अनुभव।
-भर्ती के समय आयु साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष तक। 8वीं, 10वीं या 12वीं पास योग्यता है।
-अग्निवीरों को पहले साल 30 हजार रुपये, चौथे साल तक 40 हजार रुपये तक मासिक वेतन। जोखिम सेवा भत्ते अलग।
-वेतन का एक हिस्सा सेवा निधि में जमा, जिसमें सरकार भी समान योगदान। चार साल बाद उन्हें ब्याज सहित करीब 11.71 लाख रुपये की कर-मुक्त राशि मिलती है।
-चार साल की सेवा पूरी करने पर करीब 25 फीसदी को प्रदर्शन, योग्यता और आवश्यकता के आधार पर सेना में नियमित सैनिक के रूप में शामिल किया जा सकता है।
-चार साल बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों को सेवा निधि राशि मिलती है, जिससे वे आगे की पढ़ाई, रोजगार या व्यवसाय शुरू करने में सहायता ले सकते हैं।
-सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर मिलता है। ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या शहादत की स्थिति में अतिरिक्त आर्थिक सहायता का भी प्रावधान है।
-चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को कौशल प्रमाणपत्र दिया जाता है, जो आगे उच्च शिक्षा और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में मददगार होता है।
-सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, असम राइफल्स और विभिन्न राज्य पुलिस बलों में भर्ती के दौरान आरक्षण व प्राथमिकता का प्रावधान किया गया है।
-सैन्य प्रशिक्षण के दौरान अग्निवीरों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, तकनीकी दक्षता और शारीरिक-मानसिक मजबूती विकसित होती है।