अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों के लिए अब ट्रेनिंग, वर्कशॉप, सेमिनार, सिम्पोजियम के नाम पर विदेश जाना आसान नहीं होगा। चिकित्सकों को बताना होगा और सेमिनार में शामिल होने से एम्स अथवा यहां के मरीजों को क्या फायदा होगा।
यही नहीं ट्रेनिंग अथवा सेमिनार में शामिल होने का प्रमाण-पत्र भी देना होगा। आदेश नहीं मानने पर अगले विदेश यात्रा में दिक्कत आ सकती है। एम्स के निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया के आदेश से एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया गया है जिसमें विदेशी दौरे के साथ देश के भी किसी हिस्से में सरकारी खर्च पर जाने पर बताना होगा कि इससे एम्स को क्या फायदा हुआ है।
यह भी बताना होगा कि जिस कार्यक्रम में शामिल हुए उसमें उनका क्या योगदान रहा। उनकी ओर से कार्यक्रम में किस तरक का और क्या प्रजेंटेशन दिया गया। देश के किसी हिस्से में जाने से दो से तीन सप्ताह पहले संस्थान को सूचित करना होगा और विदेश जाने की स्थिति में चार से छह सप्ताह के पहले सूचित करना होगा।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में ट्रेनिंग, वर्कशॉप, सेमिनार, सिम्पोजियम के नाम पर दो सप्ताह से अधिक की इजाजत नहीं दी जा सकती है। कार्यक्रम से लौटने के 15 दिनों के अंदर चिकित्सकों को प्रमाण-पत्र जमा कराना होगा।
इससे पहले भी इस तरह के आदेश जारी किए गए थे लेकिन कई चिकित्सकों की ओर से इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा था। जिसकी वजह से दुबारा से चिकित्सकों को आदेश दिया गया है और स्पष्ट किया गया है कि यदि तय मानकों का पालन नहीं करते हैं तो दूसरी बार विदेश यात्रा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।