डच हरियाणा बिजनेस कंसोर्सियम के डायरेक्टर (इंडिया अफेयर्स) हरीश मेहता ने मांगर क्षेत्र में प्रस्तावित यूरोपियन टेक्नोलॉजी पार्क प्रोजेक्ट रद्द करने को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बुधवार को सेक्टर-16ए स्थित अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए मेहता ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने निजी स्वार्थ के चलते फरीदाबाद में 1.19 लाख करोड़ के विदेशी निवेश को खो दिया है।
करीब 25 कंपनियों में 75 हजार लोगों के रोजगार के अवसर को खत्म कर दिया है। इससे भविष्य में विदेशी निवेश प्रभावित होगा, क्योंकि कंपनियां इस सरकार पर विश्वास नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में वैसे ही कोई बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट नहीं आ रहा था। कोई तैयार हुआ तो सरकार ने उसके साथ धोखा किया।
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) ने पार्क में 10 फीसदी फ्री शेयर लेने के समझौते के बाद भी केंद्र सरकार से इसकी क्लीयरेंस नहीं ली, जिससे इनमें आने वाली कंपनियों का नजरिया भारत के प्रति खराब हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद हॉलैंड जाकर 6 से 10 अक्तूबर 2006 के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे।
उन्होंने सरकार ने मांगर की जगह मेवात इंडस्ट्रियल एरिया में जमीन देने की बात कही थी, लेकिन कंपनी वहां जाने को राजी नहीं है। मेहता का आरोप है कि मांगर में उनका पार्क प्रस्तावित करवाकर सरकार ने अपने चहेते अधिकारियों एवं जानकारों से जमीन खरीदवा दी। मेहता ने बताया कि उनकी कंपनी सस्ता और मजबूत हाईवे बनाने के एक प्रोजेक्ट को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में है।