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ऑड ईवन : NGT की हां तो फिर क्यों हुई दिल्ली सरकार की ना

Sun, 12 Nov 2017 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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odd even - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को सम-विषम योजना को राष्ट्रीय राजधानी में सख्त शर्तों के साथ लागू करने की इजाजत दी थी। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया कि सरकार योजना लागू करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन वायु प्रदूषण के आपातकाल के दौरान इसे कई तरह की छूट के साथ लागू नहीं किया जा सकता।
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इसके बाद सरकार ने सम विषम का निर्णय वापस ले लिया, लेकिन अब जब भी सरकार इसे लागू करेगी, कठोर शर्तों पर ही लागू करना होगा। प्रधान पीठ ने शनिवार सुबह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के बयान दर्ज करते हुए आदेश में कहा कि सम-विषम योजना दोपहिया वाहनों और वीआईपी पर भी लागू होगी।

सीपीसीबी और डीपीसीसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण में दोपहिया वाहनों की बड़ी भूमिका है। वहीं आईआईटी कानपुर की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में वाहनों से होने वाले 20 फीसदी प्रदूषण में दोपहिया वाहनों की भूमिका 30 फीसदी है।
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वहीं, सम-विषम में सीएनजी वाहन, आपातकालीन सेवाओं (एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड) और कूड़ा-कचरा ढोने वाले वाहनों पर छूट रहेगी। पीठ ने कहा कि सम-विषम योजना पर लगाई कड़ी शर्तों और आदेश में किसी तरह के बदलाव के लिए याची अपील कर सकते हैं।

एनजीटी ने क्यों दी इजाजत 

odd even - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली सरकार ने 13 से 17 नवंबर तक सम-विषम योजना को छूट के साथ राष्ट्रीय राजधानी में लागू करने की घोषणा की थी। एनजीटी के आदेश बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली उच्च न्यायालय, सुप्रीम कोर्ट गठित पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (इप्का) के आदेशों के साथ एनजीटी का आदेश दिल्ली-एनसीआर की संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों को मानना होगा।

एनजीटी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में हवा का आपातकाल जैसे ही घोषित हुआ, वैसे ही सम-विषम के साथ ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत सुझाए उपायों को लागू किया जाना चाहिए था। दिल्ली सरकार इसके लिए बाध्य है। 

पीठ ने दिल्ली सरकार से सवाल किया था कि किस बुनियाद पर सम-विषम की घोषणा की गई। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान और 9 नवंबर को हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने इसे लागू करने का फैसला लिया। इस पर पीठ ने सहमति के बाद सम-विषम लागू करने की इजाजत दी। 

एनजीटी ने बनाई हवा के आपातकाल की नई सीमा

दिल्ली ऑड ईवन - फोटो : SELF
पीठ ने कहा कि 48 घंटे लगातार हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बनी रहे, उसके बाद उपाय किए जाएं, यह आधारहीन लगता है। हालत खराब होने पर इलाज कराने से बेहतर है कि पहले ही बचाव किया जाए। इसलिए संबंधित प्राधिकरण मौसम विभाग के साथ मिलकर दो-चार दिन के प्रदूषण के हालात की योजना लेकर चलें।

जैसे ही पर्टिकुलेट मैटर 2.5 का स्तर 400 और 10 का स्तर 700 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंचे या उसे पार करे, वैसे ही आपातकालीन उपायों को लागू किया जाना चाहिए। इनमें पानी का छिड़काव, निर्माण कार्य पर प्रतिबंध, सम-विषम योजना जैसे उपाय दिल्ली-एनसीआर की संबंधित सरकार और प्राधिकरण को करने होंगे। 

चार गुना पार्किंग फीस पर समीक्षा करने का आदेश 
एनजीटी ने आपातकालीन वायु प्रदूषण की स्थिति में चार गुना पार्किंग फीस बढ़ाए जाने को लेकर सरकार को समीक्षा करने के लिए कहा है। एनजीटी का यह आदेश तब आया, जब कहा गया कि पार्किंग के सभी ठेके निजी हाथों में हैं। इससे जो भी बढ़ा हुआ पैसा है, वह उनके हाथों में जा रहा है। वहीं लोग पार्किंग स्थल के बजाय सड़क पर वाहन खड़े कर रहे हैं।

जाम से बचने के लिए प्रवेश द्वारों पर सख्ती का आदेश 
एनजीटी ने कहा कि दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली से जुड़े सभी प्रवेश मार्गों पर बैरियर ठीक किए जाएं। वाहनों की लंबी कतारें ठीक की जाएं। विशेष सुरक्षा बल दिल्ली की सीमाओं पर लगाए जाएं। वहीं, ऐसे सभी निजी ट्रांसपोर्टर्स, जिन्हें दिल्ली सरकार से अनुमति मिली है, जरूरी सामानों की ढुलाई में कॉरपोरेट सोशल
रिस्पांसबिलिटी निभाते हुए सहयोग दें। 
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निर्माण कार्य जारी, पीठ ने पूछा: क्यों न भेजें जेल 

एनजीटी ने ऑड-ईवन पर केजरीवाल सरकार से पूछे सवाल - फोटो : अमर उजाला
एनजीटी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) के जरिये हो रहे निर्माण कार्यों पर कारण बताओ नोटिस दिया है। वहीं निर्माण रुकवाने की जिम्मेदारी जिनकी थी, उन अधिकारियों से पूछा है कि आखिर आप लोगों को क्यों न जेल भेज दिया जाए। एनजीटी ने प्रतिबंध के दौरान निर्माण कार्य करने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। पीठ ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि लोगों की जिंदगियों से ज्यादा जरूरी नहीं है निर्माण कार्य। 

वायु गुणवत्ता के सभी मानकों पर करना होगा विश्लेषण 
सीपीसीबी, डीपीसीसी, दिल्ली पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव को दिल्ली के विभिन्न इलाकों से हवा के नमूने एकत्र कर पर्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड व अन्य तत्वों का परीक्षण सीपीसीबी की प्रयोगशाला और आईआईटी दिल्ली से करा रिपोर्ट देने का भी आदेश दिया है। 

दिल्ली के आसपास 30 पावर प्लांट अपग्रेड करने का आदेश 
दिल्ली के आसपास मौजूद 30 थर्मल पावर प्लांट को एनजीटी ने अपग्रेड करने का आदेश दिया है। इन पावर प्लांट से 11 हजार मेगावाट बिजली पैदा होती है। वहीं बिजली के साथ ही यह पावर प्लांट प्रदूषण के बड़े स्रोत हैं। इनसे 80 फीसदी सल्फेट और 50 फीसदी नाइट्रेट निकलता है, जो हवा को गंभीर रूप से प्रदूषित करता है। यह अपग्रेड होते हैं तो इससे दिल्ली की हवा में काफी सुधार हो सकता है।
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