नर्सरी के बच्चे बताते है लीला का महत्व...
प्री-नर्सरी से लेकर नौवीं कक्षा के बच्चे अलग किरदार में नजर आते हैं। रामलीला की शुरूआत शाम 6 बजे से होती है। मंच पर अलग-अलग लीलाओं का मंचन किया जाता है। मंचन के दौरान जो भी दृश्य दिखाए जाते हैं, उसके बाद पहली और दूसरी क्लास पढ़ने वाले बच्चे संदेश देते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि मंच पर भगवान राम सबरी के झूठे बेर खाते हैं तो बच्चा बताता है कि भगवान राम छुआछूत, जात-पात को नहीं मानते थे। इसलिए उन्होंने सबरी के झूठे बेर खाए। हम सबको भी अपने जीवन में इसे अपनाना चाहिए। साथ ही रामलीला प्रांगण में हर सुबह छह बजे से 8.30 बजे तक 1008 परिवार एक साथ बैठकर रामचरित मानस का पाठ करते हैं।
415 बच्चे कर रहे मंचन
यहां एक दो बच्चे नहीं, बल्कि 415 बच्चे रामलीला में हिस्सा ले रहे हैं। खास बात यह है कि नन्हें कलाकार कुछ समय के लिए अपने रोल में इस तरह से डूब जाते हैं कि सब देखते रह जाते हैं। इनकी संवाद करने की अदा पर शानदार पकड़ है। दर्शकों को लगता ही नहीं कि ये कलाकार हैं।