मेडिकल स्टोरों पर बिकने वाली शक्तिवर्धक दवाओं और मिनरल्स की निगरानी फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ही करेगा। अभी तक ड्रग इंस्पेक्टर भी इनका परीक्षण कराते थे।
फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की 2007 में जारी हुई गाइडलाइन का पालन न होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टोर स्वामियों और कंपनियों ने इनकी बिक्री की अनुमति भी नहीं ली है।
ऐसे में अफसरों ने 20 से ज्यादा शक्तिवर्धक दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। शक्तिवर्धक दवाओं और टॉनिकों को लेकर लंबा विवाद है। ड्रग अफसर इनको दवाई मानते रहे हैं, जबकि फूड सेफ्टी अफसर इनको फूड सप्लीमेंट मानते हैं।
मिनरल्स, आयरन और कैल्शियम आदि भी इसी श्रेणी में आते हैं। शासन ने 2007 में फूड एक्ट के स्थान पर फूड सेफ्टी एक्ट लागू किया और इसमें शक्तिवर्धक दवाओं, फूड सप्लीमेंट और टॉनिकों को ड्रग से बाहर कर दिया गया।
इसके बावजूद उक्त दवाओं-मिनरल्स को बनाने और बेचने वालों ने फूड लाइसेंस नहीं लिया। ऐसे में इनका परीक्षण भी विधिवत नहीं हो पाया।
फूड सेफ्टी विभाग के सूत्रों के अनुसार मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली ताकत की दवाओं-मिनरल्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इनमें ज्यादातर बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट हैं। इनकी बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के डीओ विनीत कुमार ने बताया कि ताकत की दवाओं के साथ ही टॉनिकों और मिनरल्स का परीक्षण अब फूड डिपार्टमेंट कराएगा।
कुछ प्रोडक्ट पर रोक लगाने की सूचना अभी विधिवत प्राप्त नहीं हुई है। आदेश आते ही इनकी बिक्री बंद करा दी जाएगी।