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नोएडा: खरीदारों को न रिफंड मिल रहा ना ही घर, रेरा के आदेशों के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

Thu, 23 Aug 2018 04:00 AM IST
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
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सपनों का घर पाने के लिए 2011 में समिरुल निशा ने प्रीमिया बिल्डर के ग्रेटर नोएडा प्रोजेक्ट में बुकिंग कराई थी। 2018 तक फ्लैट नहीं मिलने पर उन्होंने रेरा में पैसे वापसी के लिए आवेदन किया। रेरा ने सुनवाई के बाद 27.5 लाख रुपये ब्याज समेत रिफंड का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा कि अगर 45 दिन में बिल्डर पैसे वापस नहीं करता तो प्रशासन और प्राधिकरण पैसे की रिकवरी कराकर खरीदार को वापस करेंगे।

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45 दिन गुजरने के बाद समिरुल ने जिलाधिकारी और प्राधिकरण को रिकवरी के लिए पत्र भी लिखा। लेकिन अब तक न तो बिल्डर ने पैसे वापस किए और ना ही प्रशासन पैसे की रिकवरी करा सका। अब उनके पास और कोई आसरा नहीं बचा है। 

यह मामला सिर्फ समिरुल निशा का नहीं हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बिल्डर प्रोजेक्टों में कई खरीदारों को रेरा ने सुनवाई के बाद पैसे वापसी के आदेश दिए। लेकिन खरीदार अभी भी पैसे वापस पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। यही नहीं ऐसे खरीदारों के पक्ष में कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहा है। इस वजह से उनको काफी निराशा हो रही है।
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दो-दो बिल्डरों ने नहीं वापस किए पैसे
आशिष मित्तल ने ग्रेटर नोएडा में पीएसए इंपेक्स के संपदा लिबिया प्रोजेक्ट में 2012 में घर बुक कराया था। पजेशन नहीं मिलने पर दिसंबर 2017 में रेरा में शिकायत की। सुनवाई के बाद अप्रैल 2018 को मूलधन के 14 लाख और उस पर लगने वाले ब्याज की राशि वापसी का आदेश आया।

इसके बाद कई बार बिल्डर को पत्र लिखा गया। लेकिन पैसे वापस नहीं मिले। इसी तरह से इनका प्रीमिया बिल्डर पर चार लाख रुपये की बुकिंग राशि बकाया है। उसके भी वापसी का आदेश आया। लेकिन पैसे नहीं मिले। जिला प्रशासन भी अब तक पैसे की रिकवरी नहीं करा सका है। 

4 सितंबर से रेरा दोबारा करेगा सुनवाई
इसी 4 सितंबर से ग्रेटर नोएडा में रेरा फ्लैट खरीदारों के शिकायतों की सुनवाई करेगा। रेरा के सचिव अबरार अहमद ने बताया कि वहां चेयरमैन और कमेटी के सदस्य सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे। फिलहाल खरीदार, बिल्डर और प्राधिकरण से बातचीत हुई है। उस आधार पर वस्तु स्थिति से अवगत कराया जा रहा है।

आम्रपाली के खिलाफ 50 दिन का प्रदर्शन भी नहीं आया काम
आम्रपाली के खिलाफ फ्लैट खरीदारों ने लगातार 50 दिन तक सेक्टर-62 के कॉरपोरेट ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन किया। लेकिन वह भी काम नहीं आया। चाहे सरकार के मंत्री हों या फिर प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारी। सभी नहीं वहां आकर वादा किया। लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ। आम्रपाली के खरीदार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

दो घंटे तक खरीदारों ने सरकार को किया ट्वीट
नोएडा-ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदारों ने बुधवार को अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए सरकार को दो घंटे तक ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से दो हैशटैग को दो घंटे तक ट्रेंड कराकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।
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खरीदारों की आस टूटने की यह भी हैं वजह

1. जिनका काम बंद है उन प्रोजेक्ट की नहीं हो रही बात
आम्रपाली, यूनिटेक, जेपी, अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रिमिया सहित कई बिल्डर प्रोजेक्टों में काम बंद है। शासन या प्राधिकरण की ओर से फ्लैट खरीदारों को घर दिलाने की जो कवायद हो रही है। उनमें वैसे प्रोजेक्ट का जिक्र है जिनका काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। उनका कोई जिक्र नहीं हो रहा है जो फंसे हुए हैं। ऐसे में खरीदारों को काफी निराशा हो रही है। ऐसे खरीदारों की संख्या करीब डेढ़ लाख है।

2. बिल्डर जेल चला जाएगा तो घर कौन बनाएगा
जिले में काफी हंगामे के बाद कई बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। लेकिन इनमें से किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। कहा यह जाता है कि अगर बिल्डर जेल चला गया तो घर कौन बनाएगा। अब खरीदारों का कहना है कि ऐसे में किसी के खिलाफ कार्रवाई की बात सोचना भी बेमानी है।

3. प्राधिकरण भी कर रहा बिल्डरों की मदद
खरीदारों की मानें तो प्राधिकरण के जिन अधिकारियों ने अपार्टमेंट एक्ट का उल्लंघन करते हुए बिल्डरों को पहले फायदा पहुंचाया। वैसे अधिकारी आज भी जमे हुए हैं। वे अब भी बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। खरीदारों का कहना है कि ऐसे में ऐसे अधिकारियों से उम्मीद कैसे की जा सकती है।

4. बिल्डरों के मनमाने चार्ज से खरीदार परेशान
जिनको बिना रजिस्ट्री के घर में रहने का मौका मिल गया। वह भी बिल्डर के मनमाने चार्ज से परेशान हैं। उनका कहना है कि फ्लैट खरीदारों से किसानों के मुआवजे की राशि वसूलने, पानी का बिल, लेबर सेस, एस्कलेशन चार्ज के नाम पर दो लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है। इसकी हर जगह शिकायत की गई। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

5. बिना जांच के प्राधिकरण कर रहा ओसी और सीसी जारी
खरीदारों के संगठन नेफोवा का आरोप है कि प्रोजेक्ट का काम पूरी तरह समाप्त होने के पहले ही प्राधिकरण आनन फानन में ओसी (ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट) और सीसी (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) जारी कर दे रहा है। प्रोजेक्ट में रहने लायक सारी सुविधाएं पूरी की गई है या नहीं। बिजली पानी की समुचित व्यवस्था है या नहीं। इन पर प्राधिकरण का कोई ध्यान नहीं है।

6. कोर्ट में भी लगातार खिंच रहा मामला
खरीदारों की मानें तो चाहे आम्रपाली का मामला हो या फिर जेपी का। दोनों मामलों में करीब एक वर्ष से बहस चल रही है, जो कि आगे भी खिंचती चली जा रही है। आलम यह है कि अभी भी इसका कोई रास्ता नहीं मिल पाया है, जिससे खरीदारों को घर मिलने की आस जग सके।

खरीदारों का एसोसिएशन भी है निराश
नेफोमा के अध्यक्ष अन्नू खान और नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती की मानें तो खरीदारों का हक दिलाने के लिए उनकी ओर लगातार प्रयास किए जाते रहेंगे। लेकिन इतने प्रयासों के बाद भी कोई हल नहीं निकलने से फ्लैट खरीदारों के साथ दोनों संगठनों को भी निराशा जरूर हुई है। उनको सरकार से एक आस जगी थी। लेकिन सरकार अभी तक कोई हल नहीं निकाल पाई है।
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