करीब ढाई साल पहले दिल्ली के अपोलो अस्पताल में एक बच्चे का दुर्लभ इलाज करने के बाद जीवन बचाया गया था, लेकिन वापस घर जाने के चंद समय बाद ही शरीर में फैले संक्रमण ने बच्चे की सांसें खतरे में डाल दी। संक्रमण के चलते उसके दिल को रक्त की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी।
दिल की जन्मजात बीमारी से पीड़ित इस पांच साल के बच्चे को एक बार फिर अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि चूंकि ये केस पहले से ही काफी दुर्लभ था, इसलिए केस में चुनौतियों से इंकार नहीं किया जा सकता। घर जाने के बाद अचानक उसे तकलीफ शुरू हुई और जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई।
दरअसल, म्यामांर निवासी पांच वर्षीय बच्चे मो के दिल में बड़ा छेद था। बाएं हिस्से का वॉल्व जन्म से ही लीक था। चिकित्सीय जांच के बाद करीब ढाई साल पहले ये बच्चा अपोलो अस्पताल आया था।
यहां डॉक्टरों ने कम उम्र और दुर्लभ चुनौतियों पर अध्ययन के बाद ऑपरेशन किया। डॉ. मुथू जोथी का कहना है कि उस वक्त उन्होंने ऑपरेशन के जरिये न सिर्फ दिल का छेद बंद किया था, बल्कि बायीं ओर के वॉल्व मिट्रल की मरम्मत भी की थी, ताकि उसका लीक होना बंद हो सके।