डॉ. पीहू सेठी के बताया कि यह प्रतिरक्षा जनित (इम्यून-मीडिएटेड) साइटोटॉक्सिक प्रतिक्रिया है, जिसमें त्वचा की कोशिकाएं (केराटिनोसाइट्स) प्रभावित होती हैं। इसके कारण एंटीबॉडी शरीर के खिलाफ ही काम करने लग जाती है। उन्होंने बताया कि सर्जरी विभाग, ईएनटी, नेत्र रोग विभाग के डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. गौरांगी, डॉ. सत्येंद्र और डॉ. समक्ष की टीम ने 10 दिन में बच्चे का सफल इलाज कराने में कामयाबी हुई। 15 दिनों बाद उसे छुट्टी दे दी गई है।