केंद्र सरकार ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर पांच वर्ष के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया है। हाईकोर्ट ट्रिब्युनल ने बुधवार को केंद्र सरकार के फैसले पर मोहर लगाते हुए मामले में अपने निर्णय संबंधी सीलबंद रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेज दी है।
अब 6 अगस्त से पांच वर्ष तक सिमी पर प्रतिबंध रहेगा। इससे पूर्व सरकार दो वर्ष के लिए प्रतिबंध बढ़ाती रही है।
प्रतिबंध मुद्दे पर सुनवाई के लिए गठित ट्रिब्युनल के न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने सिमी के प्रतिबंध बढ़ाने संबंधी केंद्र सरकार के फरवरी के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सिमी के खिलाफ पेश दस्तावेजों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि सिमी के सदस्य गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं और राजधानी में हुए बम विस्फोट में भी उसका हाथ था।
अत: प्रतिबंध उचित है। इस दौरान ट्रिब्युनल ने दिल्ली के अलावा केरल, गुजरात, उड़ीसा इत्यादि राज्यों में भी सुनवाई की। ट्रिब्युनल ने केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि सिमी पर वर्ष 2001 में गैरकानूनी गतिविधियों को देखने के बाद ही प्रतिबंध लगाया था और अभी भी आतंकी गतिविधियों में लिप्त है।
उन्होंने कहा कि उसकी ऐसी गतिविधियों में लिप्तता को देखते हुए प्रतिबंध कायम रखना जरूरी है। कई बम विस्फोट की घटनाओं में जांच से स्पष्ट हुआ है कि सिमी के सदस्य संगठन का नाम बदलकर इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इसके अलावा राजधानी व अन्य स्थानों में हुए बम विस्फोट मामले में गिरफ्तार आतंकियों ने माना है कि वे सिमी के सक्रिय सदस्य हैं।