दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) ने नामी कंपनियों की डीलरशिप देने के नाम पर ठगने वाले गिरोह का खुलासा कर पांच जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार किशोरों को भी पकड़ा है। आरोपी पूरे देश में 500 से ज्यादा लोगों को ठग चुके हैं। आरोपी नामी कंपनियों की वेबसाइट से मिलती-जुलती साइट बनाते और फिर डीलरशिप देने का ऑफर देते थे। पीड़ित जब पैसे जमा करा देते थे तो आरोपी मोबाइल व बैंक खाता बंद कर गायब हो जाते थे।
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त प्रशांत गौतम ने बताया कि शालीमार बाग निवासी व्यवसायी गुलशन चड्ढा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें अज्ञात नंबरों से कॉल आईं। फोन करने वाले ने खुद को आईटीसी (इंडियन टोबैको कंपनी) कंपनी का अधिकारी बताते हुए शिकायतकर्ता को डीलरशिप देने की बात कही। चड्ढा ने डीलरशिप लेने के लिए 50 लाख रुपये जमा करा दिए, लेकिन उन्हें डीलरशिप नहीं मिली और आरोपियों के नंबर भी बंद हो गए। पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर एसीपी जेपी शर्मा की देखदेख में इंस्पेक्टर नरेंद्र की टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता लगा कि गिरोह बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से संचालित हो रहा है। हवलदार दिनेश खत्री, अमित दहिया व सिपाही रेखा की टीम ने पटना में दबिश देकर एक नाबालिग को पकड़ लिया। इसकी निशानदेही पर तीन और नाबालिग पकड़े गए। इनसे पूछताछ के बाद निशांत गुप्ता उर्फ सौरव को गिरफ्तार किया गया।
नाबालिगों से पूछताछ में पता लगा कि दीपक के बैंक खाते में पैसा गया है। इसके बाद पटना से दीपक को पकड़ा गया। इसकी निशानदेही पर गाजियाबाद से सूरज व संतोष को गिरफ्तार किया गया। संतोष के खुलासे पर मध्यप्रदेश के ग्वालियर से सुनील शाक्य को दबोचा गया। इनके पास से 3 लैपटॉप, 21 मोबाइल, 2 हार्ड डिस्क, 2 टैबलेट, 20 सिम, 20 एटीएम कार्ड, 6 बैंक पासबुक और 4 चेक बुक बरामद की गई।
अलग-अलग थी भूमिका
पहला नाबालिग : एक फोन बरामद हुआ। आरोपी इसका इस्तेमाल नेट बैंकिंग से ठगी गई रकम को दूसरों खातों में ट्रांसफर करने के लिए करता था।
निशांत गुप्ता उर्फ सौरव (27) : नाबालिगों को लालच देकर आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर खाते खुलवाता था। खोले गए खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन में किया जाता था।
दीपक (27) : वह एसबीआई में सीएसपी चलाता था और मनी ट्रांसफर करता था। रकम अपने खाते में रखता था।
सूरज (29) : नामी कंपनियों की फर्जी बेवसाइट बनाता था।
सुनील (41) : विज्ञापनों में गलत टोल-फ्री नंबर देकर डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए ऑनलाइन अभियान और विज्ञापन चलाता था। धोखाधड़ी की गई कुल राशि का 30 फीसदी भुगतान किया गया।
संतोष (27) : पीड़ितों का विवरण रखकर गिरोह चलाता था। हिस्सा देता था।