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मछली माफिया के ‘खेल’ में खुफिया तंत्र फेल

Sat, 01 Nov 2014 11:10 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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नहर में जहर मिलाकर पानी को विषाक्त करने और मछलियों को मारने का क्रम कई साल से जारी रहने के बावजूद एलआईयू को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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इस मामले में खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ। मछलियों को मारकर मुंबई तक इनका कारोबार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र का सौहार्द बिगड़ सकता है।

सिंचाई विभाग के अफसरों की मिलीभगत से चल रहे धंधे पर कमिश्नर ने रिपोर्ट मांगी है। सामाजिक संगठनों के साथ ही कांग्रेस, बसपा व रालोद के विधायक भी खुलकर सामने आ गए हैं।

गंगनहर के आसपास के गांवों के लोगों में भी इसके खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारियोें ने मामले की सुध नहीं ली है। मछली माफिया इनका कारोबार मुंबई तक कर रहा है।
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जहर देकर मारी जाने वाली मछलियों की सप्लाई आसपास के जिलों में तो हो ही रही है, बड़ी मात्रा में मुंबई की मछली मंडी में भी भेजा जाता है। कई चैनलों से होकर जाने के चलते माफिया को इसमें सीधे फंसने का खौफ भी नहीं रहता।

क्षेत्र के लोगों की मानें तो सिंचाई विभाग और पुलिस की मिलीभगत से जहर मिलाकर मछली मारने वाले माफियाओं का खेल चल रहा है। सिंचाई विभाग के अफसरों और पुलिस से इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। निवाड़ी पुलिस ने जहर मिलाने वाले तीन युवकों को लोगों की शिकायत के बाद पकड़ा, लेकिन उनको कुछ देर बाद छोड़ दिया गया।
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तीन साल से चल रहे इस धंधे की भनक तक अफसरों और खुफिया विभाग को नहीं लगी। अब कमिश्नर के रिपोर्ट मांगने केबाद अधिकारियों में हड़कंप मचा है।

सिंचाई विभाग केअधिकारियों को कमिश्नर को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपनी है। गंगनहर के आसपास के गांवों के लोगों का मानना है कि नहर में जहर मिलाने वाले गिरोह के सरगना बड़े सफेदपोश होने से स्थानीय अफसर हिचक रहे हैं।
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