जिले में स्वास्थ्य विभाग के प्रयास के चलते मलेरिया के मरीजों की संख्या में इस वर्ष कमी देखने को मिली। मलेरिया जैसी बीमारी पर नियंत्रण करने के लिए विभाग ने बीमारी का मौसम शुरू होने से दो-तीन माह पहले ही काम करना शुरू कर दिया था। गांव-गांव जाकर फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव कराया गया। विभाग द्वारा मलेरिया की रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास किए गए। जिस कारण इस वर्ष अब तक मलेरिया के सबसे कम मरीज पाए गए हैं। विभाग की तरफ से इस वर्ष 1 लाख से अधिक घरों से रक्त जांच के नमूने लिए गए जिनमें 181 मलेरिया के मरीज पाए गए। इसी तरह वर्ष 2018 में 81 हजार 300 के करीब जांच नमूने लिए गए। जिनमें से 362 मलेरिया के केस पाए गए। लोगों को जागरूक करने के लिए शहर व गांवों के साथ-साथ स्कूल कॉलेजों में जागरूकता कैंप लगाए गए।
विभाग के अनुसार वर्ष 2011 में पूरे जिले में मलेरिया के 489, वर्ष 2012 में 723, वर्ष 2013 में 803, वर्ष 2014 में 415, वर्ष 2015 में 407 मरीजों की पहचान की गई। इसी तरह मलेरिया के मरीजों की संख्या में उतार चढ़ाव आता रहा और 2019 में इसकी संख्या घटकर सिर्फ 181 हो गई।
टीम के सदस्य घर-घर जाते हैं और वहां जाकर जांच करते हैं। जहां लार्वा मिलता है। वहां एतिहात बरतने को बोला जाता है। अगर वहां दोबारा लार्वा मिलता है तो नोटिस भी दिया जाता है। शहर में वार्ड के हिसाब से टीम काम करती है और गांवों में बने सब-सेंटरों पर एक एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारी तैनात होता है। जो पांच गांवों की देखरेख करता है। फील्ड में 10 कर्मचारी काम करते हैं, एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों की संख्या 78 है। जो काम में जुटी होती है। घरों में आईआरएस करने के लिए 50 कर्मचारी भर्ती किए हुए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों की संख्या 5 है। जो पूरे काम का अवलोकन करती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों के सहयोग से मलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। अबकि बार सबसे अच्छी बात ये रही कि पिछले वर्षों में जिन गांवों में मलेरिया के हर वर्ष केस मिलते थे। उनमें 25 ऐसे गांव हैं। जिनमें इस वर्ष एक भी केस नहीं मिला है। पिछले 9 वर्षों की भांति इस वर्ष मलेरिया के सबसे कम मरीज पाए गए।
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-डा. पंकज, जिला मलेरिया अधिकारी, पलवल