फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिर से जुड़े बच्चों की सर्जरी का पहला चरण पूरा, दो मॉक ड्रिल करके जांची गई सफलता

Wed, 30 Aug 2017 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 24 घंटे तक चली सर्जरी में दोनों बच्चों के दिमाग से जुड़ी नसों को किया गया बायपास
  • एम्स में सोमवार तड़के शुरू हुई सर्जरी, मंगलवार सुबह साढ़े छह बजे हुई पूरी, बच्चों की हालत स्थिर
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) के विशेषज्ञों को ओडिशा से दिल्ली पहुंचे सिर से जुड़े दो जुड़वां भाई जग्गा और बलिया (दो साल चार महीने) को अलग करने की सर्जरी के पहले चरण में सफलता मिल गई है।
विज्ञापन


एम्स के 40 डॉक्टरों की टीम ने 24 घंटे लगातार चली सर्जरी के पहले चरण में दोनों बच्चों के दिमाग से जुड़ी नसों को बायपास किया है। एम्स का दावा है कि बच्चों की हालत स्थिर है। सर्जरी की खास बात यह रही कि इसमें रक्तस्राव काफी कम हुआ। एम्स के इतिहास में पहली बार न्यू बाईपास तकनीक का प्रयोग किया गया।

एम्स प्रबंधन के मुताबिक, एम्स परिसर में ही न्यूरो साइंसेज सेंटर में एम्स पीडियाट्रिक न्यूूरो सर्जन डॉ. दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सोमवार सुबह तड़के दोनों जुड़वां भाइयों की सर्जरी शुरू हुई थी, जो मंगलवार सुबह साढ़े छह बजे तक जारी रही।
विज्ञापन

जापान से भी विशेषज्ञ बुलाए गए

- फोटो : अमर उजाला
हालांकि एम्स की इस पहली सर्जरी में एम्स के ही न्यूरो सर्जरी के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. एके महापात्र भी दिशा-निर्देश दे रहे थे। डॉ.  दीपक गुप्ता ने बताया कि सिर से जुड़े बच्चों को अलग करने के लिए कई सर्जरी होगी, जिसमें यह सबसे बड़ी सर्जरी थी, जो सफल रही है।

सर्जरी को सफल बनाने के लिए जापान से भी विशेषज्ञ बुलाए गए हैं। क्योंकि अभी तक इस प्रकार की सर्जरी यहां नहीं हुई है। सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों के इस दुर्लभ केस में सर्जरी काफी मुश्किल थी। क्योंकि उनकी ब्लड वेंस उनके दिमाग से होते हुए उनके हार्ट तक रक्त पहुंचाती थीं।

डॉ. दीपक ने बताया कि इन जुड़वां बच्चों को अलग करने के लिए तीन महीने के अंतराल पर एक या दो सर्जरी और होगी। डॉ. गुप्ता का कहना है कि उनके दिमाग में नसें किस हद तक जुड़ी हैं और सर्जरी संभव है या नहीं, इसके लिए ही बच्चों के एमआरआई, सीटी स्कैन और एंजियोग्राम जैसे कई टेस्ट किए गए थे।
विज्ञापन

रिजल्ट पॉजीटिव आने के बाद ही सर्जरी का फैसला किया

- फोटो : अमर उजाला
रिजल्ट पॉजीटिव आने के बाद ही सर्जरी का फैसला किया गया था। सर्जरी में न्यूरो एनेस्थीसिया की टीम में डॉ. मिहिर पांडया, डॉ. गिरिजा रथ और प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रेक्टिव सर्जरी टीम में डॉ. मनीष सिंघल के अलावा डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने भी सहयोग दिया। बता दें कि 1952 से अब तक दुनियाभर में इस तरह के करीब 50 सर्जरी किए गए हैं, जिनमें से करीब 25 फीसदी ही कामयाब हुए हैं।

दो मॉक ड्रिल से सर्जरी की सफलता जांची
सूत्रों के मुताबिक, इस सबसे बड़ी सर्जरी को करने से पहले विशेषज्ञों की टीम ने 20 व 22 अगस्त को सात-सात घंटे की दो मॉक ड्रिल भी की है। इसके लिए दो ओटी के साथ दो टीम भी तैयार रखी गई थी। इसमें नकली खोपड़ी पर विशेषज्ञों की टीम ने सर्जरी करके जांचा कि कैसे कट करना है और बाद में ब्रेन के जांच के साथ दोनों के सिर कैसे अलग करने हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें