कुछ वर्ष पहले देश में कुपोषण सबसे बड़ी परेशानी था, जिसे लेकर अभी तक सरकारें जमीनी स्तर पर कामयाब नहीं हो सकी हैं, लेकिन अब मोटापा भी एक बड़ी दुविधा बनकर सामने आ रहा है। इसके प्रमाण देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में देखने को मिल रहे हैं, जहां युवाओं की संख्या सर्वाधिक है।
मंगलवार को एम्स में हुए एक कार्यक्रम में डॉक्टरों ने अहम जानकारियां दीं। जनवरी 2008 में एम्स देश का पहला ऐसा सरकारी अस्पताल था, जहां सबसे पहले बेरिएट्रिक सर्जरी शुरू हुई थी। अब धीरे-धीरे यहां भी सैकड़ों मरीज हर दिन डॉक्टरों से परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार 70 फीसदी मरीज 30 से 50 वर्ष की आयु के हैं।
सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि देश पहले कुपोषण से परेशान था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मोटापे की समस्या बढ़ रही है। मोटापे के साथ लोगों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, स्लीप एपनिया के मामले भी बढ़ रहे हैं। यह हर तीसरे मरीज में पाया जा रहा है।
ऐसे मरीजों के लिए करीब 11 साल पहले एम्स में बेरिएट्रिक सर्जरी की शुरुआत हुई थी, अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों का इस पद्धति से उपचार हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस सर्जरी के बाद मरीज साल में 40 किलो तक वजन कम कर लेता है।
इसके अलावा मधुमेह की समस्या भी काफी हद तक दूर हो जाती है। कई मरीजों के लीवर में समस्या आ चुकी होती है। सर्जरी के बाद इसमें भी सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि एम्स विश्व स्तरीय सुविधा दी जा रही है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीजों को सर्तक रहने की जरूरत है।