आम आदमी पार्टी का अस्तित्व भले ही तीन साल का हो लेकिन अपने बाल्यकाल में उसने कई नए प्रयोग कर डाले हैं। जबकि सरकार छोड़ने, धरना देने और अब टिकटों के दावेदारों को जनता की पसंद के अनुसार शॉर्ट लिस्ट करने सहित कई प्रयोगों में उसे कदम वापस भी खींचने पड़े।
49 दिनों तक सरकार चलाने वाली ‘आप’ ने 18 महीनों में अपने दूसरे विधानसभा चुनाव में दावेदारों में से उम्मीदवार को शॉर्ट लिस्ट करने की शर्त हटा ली है। पार्टी का कहना है कि जीते उम्मीदवार व जनता के बीच काम करने वाले हारे उम्मीदवारों को फिर से खड़ा करने में अन्य उम्मीदवारों के बीच शॉर्ट लिस्ट करने की जरूरत नहीं समझी गई।
ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व राखी बिड़लान सहित पार्टी के अन्य मुख्य नेता जनता के बीच काम नहीं कर सके? क्योंकि इस सूची में उनका नाम भी नहीं है।
आप ने विपक्ष को दिया एक नया हथियार
दिल्ली विधानसभा आम चुनाव 2013 में पहली बार मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी ने 24 मई 2013 को दावेदारों की पहली सूची जारी की थी। इस सूची में सीधे उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए गए, बल्कि 12 सीटों के लिए आवेदन करने वाले 106 दावेदारों के नामों में से 44 नाम शॉर्ट लिस्ट किए गए थे।
बाद में जनता की राय व पार्टी के निर्णय के अनुसार इन नामों में से शॉर्ट लिस्ट कर उम्मीदवारों के चयन का दावा किया गया। यह प्रक्रिया सभी सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में अपनाई गई।
उस समय पर पार्टी का कहना था कि पैसे के दम पर या भाई-भतीजावाद के तहत टिकट बांटने की कांग्रेस-भाजपा की राजनीति को आम आदमी पार्टी ने यह प्रक्रिया अपनाकर चुनौती दी है।
जिन सीटों पर इस बार उम्मीदवारों की घोषणा की गई है उनमें से भी कई सीटों पर पिछली बार दावेदारों की लंबी सूची थी। इसमें तब कोंडली से चार, मालवीय नगर में तीन, ग्रेटर कैलाश में पांच, सदर बाजार में तीन, मटियाला से तीन नाम दावेदारों में शामिल थे।
क्या इन्हें हारने का डर है
टिकट मांगने वाले लोगों के समक्ष भी उस समय पर यह शर्त लगा दी जाती कि आवेदन के बाद उन्हें तय प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि इसके बाद लोकसभा चुनाव में उसने उम्मीदवारों का चयन सीधे किया था लेकिन मोदी लहर के बीच उसने बड़े नामों का इस चुनाव में इस्तेमाल किया था।
जाहिर है कि मध्यावधि चुनाव की घोषणा से पूर्व ही उम्मीदवारों की घोषणा करने में फर्स्ट रहने वाली ‘आप’ को विपक्ष इस मसले पर भी घेरेगा। पहले भी पार्टी के भीतर व बाहर यह सवाल उठे थे कि शॉर्ट लिस्ट करने के बहाने केजरीवाल ने अपनी पसंद के नेताओं को ही उम्मीदवार बनाया है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल के सरकार छोड़ने व धरने पर बैठने सहित कई मुद्दों को उसके राजनैतिक मुद्दा बनाने के बाद अब पार्टी उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया बदलने पर भी ‘आप’ पर हमला करेगी।
कांग्रेस यह सवाल पूछने की तैयारी कर रही है कि जब हारे हुए उम्मीदवारों को भी क्षेत्र की जनता के बीच काम करने पर टिकट दिया गया तो पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद के अलावा उसके दूसरे नंबर के नेता मनीष सिसोदिया व तेज तर्रार मंत्री रहीं राखी बिड़लान को पहली सूची में टिकट क्यों नहीं दिया गया?