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भारत में पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन, टीबी से पीड़ित महिला को मिला नया जीवन

Thu, 16 Feb 2017 04:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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- फोटो : अमर उजाला
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स्पाइनल क्षयरोग से ग्रसित 32 वर्षीय महिला को प्रिंटेड कृत्रिम वर्टिब्रे से नई जिंदगी दी गई। मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने सफल सर्जरी स्पाइनल रिकंस्ट्रक्शन पूरा करते हुए इस महिला मरीज को दोबारा से चल पाने के काबिल बनाया।
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डॉक्टरों की एक टीम ने मरीज के पहले तथा चौथे सर्वाइकल वर्टिब्रे के बीच का फासला मिटाने के लिए क्षतिग्रस्त वर्टिब्रे के स्थान एक 3डी प्रिंटेड टाइटेनियम वर्टिब्रे लगाई। मरीज स्टेरॉयड के अधिक सेवन की वजह से क्षय रोग से पीड़ित थीं।

इससे इनकी प्रतिरक्षण क्षमता घट चुकी थी और 10 अलग-अलग रीढ़ के जोड़ में टीबी हो गई थी। पहले से तीसरे तक रीढ़ का जोड़ गंभीर रूप से इतना क्षतिग्रस्त हो चुका था कि सिर एवं निचले रीढ़ के जोड़ के बीच कोई हड्डी का सहारा नहीं रहा।
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भारत में पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन

operation - फोटो : अमर उजाला
सिर एवं रीढ़ के निचले हिस्से के बीच संपर्क टूट गया और सिर आगे की ओर झुकता जा रहा था। सांस की नसों का दबना जारी था। मेदांता अस्पताल का दावा है कि 10 घंटे तक चला यह ऑपरेशन भारत में पहला और विश्व में अपनी तरह का तीसरा रिकंस्ट्रक्शन ऑपरेशन है।

इसे 3डी प्रिंटेड वर्टिब्रे के साथ किया गया। डॉ. वी आनंद नाइक का कहना है कि यह एक बेहद मुश्किल सर्जरी थी और मरीज की स्थिति हर दिन बिगड़ती जा रही थी। यह सर्जरी एक 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के बगैर संभव नहीं हो पाती।

डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले टाइटेनियम केज को मरीज की वास्तविक रीढ़ की तरह बनाया गया। मरीज की रीढ़ की एक डमी का 3डी प्रिंट निकालकर पहले और चौथे सर्वाइकल वर्टिब्रे के बीच के अंतर और विभाजन का माप लिया गया। इस 3डी टाइटेनियम इम्पलांट को शरीर में स्थापित करने के लिए प्रिंट किया गया।
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