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Delhi NCR News: हाई-टेक प्लान, लो-टेक सिस्टम में फंसी फायर सेवा

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स्टाफ की भारी कमी, पुराने उपकरण और मैनुअल सिस्टम के बीच टेक्नोलॉजी अपग्रेड का दावा, बढ़ती आग की घटनाओं ने बढ़ाया दबाव
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ती आग की घटनाओं के बीच दिल्ली अग्निशमन सेवा एक बड़े टेक्नोलॉजी अपग्रेड की तैयारी कर रही है। विभाग इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जीपीएस और जीआईएस आधारित एक केंद्रीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर संसाधनों की कमी इस पहल की रफ्तार और असर दोनों पर सवाल खड़े कर रही है। विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर की है। वर्तमान में अग्निशमन सेवा के पास 71 फायर स्टेशनों पर करीब 2,459 ऑपरेशनल कर्मचारी हैं, जबकि गृह मंत्रालय के के तहत स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी कमेटी के मानकों के अनुसार यह संख्या लगभग 24,000 होनी चाहिए। यानी जरूरत के मुकाबले महज एक छोटा हिस्सा ही उपलब्ध है। तकनीकी रूप से भी सिस्टम अभी काफी हद तक पुराने ढांचे पर निर्भर है।
कंट्रोल रूम में कई प्रक्रियाएं अब भी मैनुअल हैं, जिससे कॉल रिस्पॉन्स और संसाधनों की तैनाती में देरी होती है। संचार के लिए पुराने वायरलेस सेट इस्तेमाल हो रहे हैं और कई बार कर्मियों को मोबाइल फोन पर निर्भर रहना पड़ता है, जो आपात स्थितियों में भरोसेमंद नहीं माना जाता। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए प्रस्तावित कंट्रोल सेंटर में रीयल-टाइम कॉल ट्रैकिंग, लोकेशन बेस्ड डिस्पैच और संसाधनों की बेहतर मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं होंगी। फायर टेंडरों में मोबाइल डेटा टर्मिनल लगाए जाएंगे और वाहनों में कैमरे लगाकर मुख्यालय से लाइव निगरानी की योजना है। अधिकारियों का दावा है कि इससे रिस्पॉन्स टाइम घटेगा और मानवीय हस्तक्षेप कम होगा।
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अप्रैल में 2600 से अधिक दर्ज की गई आग की काॅल : आंकड़े बताते हैं कि चुनौती सिर्फ तकनीक से हल नहीं होगी। अप्रैल में ही 2,600 से अधिक फायर कॉल दर्ज की गईं, जबकि इस साल अब तक 40 से ज्यादा लोगों की मौत आग की घटनाओं में हो चुकी है। विभाग ने हाल के महीनों में कुछ संसाधन बढ़ाए भी हैं, जैसे छोटे वाटर टेंडर, बाउजर, क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल और संकरी गलियों के लिए मोटरसाइकिल यूनिट, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ती जरूरत के मुकाबले अभी भी अपर्याप्त है।


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