फरीदाबाद के दशहरा ग्राउंड में अस्थाई रूप से लगाई गईं करीब 250 पटाखा दुकानों के लिए ठेकेदार ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। यहां तक कि जल्दी आग पकड़ने वाले रेशमी कपड़ों से दुकानें बनाई गई थीं।
अगर दुकानें अग्निरोधी कपड़े या तिरपाल से बनाई गई होतीं तो शायद आग को पहले काबू किया जा सकता था। अग्निकांड में पटाखों के रूप में पूंजी गंवाने वाले दुकानदारों के यही आरोप हैं। दुकानदारों ने ठेकेदारों के खिलाफ एसजीएम नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
202 नंबर दुकान के मालिक हेमंत ने ठेकेदार अनिल चंदीला, अज्जू और अजीत टोंगर पर आरोप लगाया कि इन्होंने सुरक्षा इंतजाम न कर दुकानदार और ग्राहकों की जान जोखिम में डाली। आरोप है कि ठेकेदार ने स्वास्थ्य, पुलिस और फायर ब्रिगेड के लिए बनाए गए स्टॉल भी मोटी रकम लेकर आतिशबाजों को बेच दिए।
शॉर्ट सर्किट के लिए भी दुकानदार ठेकेदार को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इलेक्ट्रिक की अस्थाई वायरिंग दुकानों के ऊपर से गुजारी गई। तार जगह जगह कटे होने की वजह से स्पार्किंग और शॉर्ट सर्किट का जोखिम था और वही हुआ।
ठेकेदार ने बाजार में कहीं भी पानी से भरे ड्रम और बालू की बाल्टियां नहीं लगवाईं जबकि इस सबके लिए सभी दुकानदारों से मोटी फीस वसूली गई थी। एसएचओ एसजीएम नगर ने बताया कि हेमंत की तहरीर पर एनआईटी दशहरा ग्राउंड आतिशबाजी बाजार के ठेकेदार अनिल चंदीला, अज्जू और अजीत टोंगर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
तो मिलेगी सिर्फ छह माह की सजा
जिन ठेकेदारों की गलती से करोड़ों रुपयों की संपत्ति स्वाहा हो गई यदि उनका जुर्म साबित हो जाता है तो उन्हें सिर्फ छह माह की कैद या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।