गुड़गांव के सदर बाजार की के हालत ऐसी है कि अगर यहां आग लग जाए तो दमकल की गाड़ियां पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। भगदड़ की स्थिति में जन हानि भी हो सकती है। पिछले वर्ष भी दिवाली के मौके पर आग लगी थी, इसके बावजदू स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
जबकि पर्व के मौके पर हर दिन 70 हजार से अधिक लोग यहां खरीदारी करने आते हैं। पुरानी इमारतें, संकरी गलियों और अतिक्रमण के बीच की स्थिति पर पेश है अमर उजाला संवाददाता शाहनवाज आलम और फोटोग्राफर दिनेश कुमार की रिपोर्ट:
अतिक्रमण मुक्त नहीं है बाजार
नगर निगम सदर बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर कई बार अभियान चला चुका है और अतिक्रमण मुक्त रखने का दावा करता है, लेकिन यह हकीकत से परे हैं। फुटपाथ पर दुकान सजी हैं। निगम दस्ता इन्हें हटात है, लेकिन इनके जाते ही दुकानें सज जाती है।
इस अगर आगजनी की कोई घटना होती है तो सदर बाजार में अतिक्रमण के बीच घटना स्थल तक पहुंचना बहुत मुश्किल है। संकरी गलियों के बीच फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सिर्फ सायरन बजाती रह जाएंगी। बस स्टैंड से सदर बाजार की ओर जाने वाले रास्तों पर पूरे दिन वाहन खड़े रहते हैं।
पैदल निकलना भी मुश्किल है। रही सही कसर सड़कों के बीच में बेतरतीब वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था पूरी कर देती है। सदर बाजार में जाने के लिए रामलीला ग्राउंड ओल्ड डाकखाना रोड से अधिक आना-जाना होता है। लेकिन दोनों ही रोड पर अतिक्रमण के कारण गाड़ियों से फंसना आम है।
रेहड़ी खोमचे से भी लगता है जाम
रामलीला ग्राउंड में आड़े-तिरछे खड़े वाहनों के कारण समस्या और विकट हो गई। रामलीला ग्राउंड में वाहन पार्क किए जाने से रास्ता पूरी तरह बंद रहा, जिससे पैदल लोगों के निकलने के लिए भी रास्ता नहीं बचता। बाकी कसर रेहड़ी, खोमचे पूरी कर देते हैं।
नगर निगम की ओर से पीली लाइन खींची गई थी, ताकि दुकानें बाहर नहीं आएं। लेकिन पीली लाइन अब गुम हो चुकी है। दुकानें बाहर सजी हुई है। आठ फुट चौड़ी सड़क वाले इस इलाके में आपदा के समय राहत पहुंचाना भी मुश्किल है। दो साल पहले एक शो रूम में आग लगने पर दमकल की गाड़ियां भी नहीं पहुंच पा रही थीं।
कभी ट्रेनिंग भी नहीं हुई
आपदा से निपटने और आपदा के वक्त क्या करना चाहिए और क्या नहीं? इस बारे में इस इलाके के लोगों को कभी ट्रेनिंग नहीं दी गई। न ही लोगों को इस बारे में जागरूक करने का प्रयास किया गया।
ऐसे में आपदा के समय स्थिति खतरनाक हो सकती है। ट्रेडर्स व्यापार मंडल हरियाणा के जिला अध्यक्ष कन्हैया लाल पाहवा का कहना है कि प्रशासन को इस बाबत कदम उठाना चाहिए।