आरोप लगाया गया है कि वीडियो में ईसाई समुदाय के पवित्र धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक सांता क्लॉज को अपमानजनक और असंवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया। उसमें सांता क्लॉज को सड़क पर बेहोश अवस्था में गिरते हुए दिखाया गया और उन्हें राजनीतिक संदेश देने के लिए प्रतीकात्मक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया। वीडियो में सांता क्लॉज पर नकली सीपीआर करते हुए मजाक उड़ाया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने सेंट निकोलस और क्रिसमस जैसे पवित्र पर्व की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।
शिकायत के अनुसार, यह वीडियो जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण मंशा से तैयार और प्रसारित किया गया, ताकि ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सके। इसमें उल्लेख किया गया है कि एडवेंट काल के अंतिम दिनों में धार्मिक प्रतीक का इस प्रकार राजनीतिक उपयोग करना आस्था और परंपराओं का अपमान है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि सार्वजनिक रूप से किसी धार्मिक प्रतीक का उपहास या अपमान करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 302 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है। वीडियो की सामग्री, उसके प्रसारण का उद्देश्य, समय और संदर्भ के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके प्रभाव की भी जांच की जा रही है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर पलटवार किया
दिल्ली में प्रदूषण को लेकर सांता क्लॉज की पॉलिटिकल स्किट पर एफआईआर दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर पलटवार किया। आप के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे को उजागर करने से भाजपा सरकार घबरा गई है और उसी डर के कारण एफआईआर का सहारा लिया गया है। उन्होंने कहा कि स्किट ने भाजपा की केंद्र और दिल्ली सरकार को एक्सपोज कर दिया, इसलिए भाजपा कार्यकर्ताओं के जरिए केस दर्ज कराया गया।