हाथरस जमीन घोटाला मामले में यमुना प्राधिकरण ने 2011-12 में करीब 42 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया। इसके बदले किसानों को सात प्रतिशत विकसित भूखंड देने का प्रावधान है, जिसके लिए प्राधिकरण को पांच हेक्टेयर जमीन की जरूरत थी, लेकिन 2014 में अधिकारियों ने कुछ लोगों से मिलीभगत करके हाथरस जिले के मिधावली गांव में जरूरत से अधिक 14.48 हेक्टेयर जमीन खरीद ली। यह जमीन पहले फेज के मास्टर प्लान से बाहर है।
उस समय इस जमीन को खरीदने में 16.15 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्तमान समय में इस पर 7.77 करोड़ रुपये ब्याज देना पड़ा। दोनों को जोड़कर 23.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एक शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सब जान बूझकर और गिरोह बनाकर किया गया।
जमीन खरीद के इस गिरोह में शामिल दिल्ली, बुलंदशहर, आगरा, गाजियाबाद आदि जगहों से जुड़े लोगों ने पहले किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीद ली। इसके तुरंत बाद यीडा ने उसे खरीद लिया, जबकि इन जमीनों पर अब तक प्राधिकरण का कब्जा नहीं है और न ही इस पर कोई प्लान बन सका है। कासना कोतवाली प्रभारी अजय कुमार का कहना है कि यीडा की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जमीन खरीदने में इन लोगों के हैं नाम
हाथरस में जिन लोगों ने किसानों से जमीन खरीदी और उसे प्राधिकरण ने अधिग्रहीत किया उनमें मनोज कुमार पुत्र तेजपाल सिंह, गौरव पुत्र तेजपाल सिंह, अनिल पुत्र जगपाल सिंह, निर्दोष चौधरी पुत्र सत्यवीर सिंह, सत्येंद्र पुत्र तुरसनपाल, स्वेदश गुप्ता पुत्र आरसी गुप्ता, एनएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड, विवेक कुमार जैन पुत्र निरोतमदास जैन, (मथुरा जमीन घोटाले के प्रकरण में भी इनकी भूमि हिमालया इंफ्रा वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से थी), धीरेंद्र सिंह चौहान पुत्र राजेंद्र बहादुर चौहान, मदन पाल सिंह पुत्र कृपाल सिंह, अजीत कुमार सिंह पुत्र मदन पाल सिंह।