सीएम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने अपने बजट के केंद्र में हमेशा आम आदमी को रखा है। इस बार भी बजट का केंद्र आम आदमी ही रहेगा, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख रूप से शामिल हैं। दिल्ली सरकार इन बिन्दुओं पर सबसे ज्यादा फोकस करेगी। सरकार की प्राथमिकताओं में शिक्षा हमेशा से सबसे उपर रही है। इस बार भी शिक्षा के लिए सबसे अधिक धन आवंटित किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को और मजबूत व बेहतर बनाने पर बजट में धन आवंटित किया जाएगा। सरकार हर बार की तरह इस बार भी बजट में अपने नागरिकों को पर्याप्त बिजली और साफ पानी मुहैया कराने पर बल देगी। दिल्ली के अंदर विभिन्न विकास कार्यों को लेकर भी अच्छा खासा धन आवंटित किए जाने की उम्मीद है।
कॉलेजों में आंत्रप्रिंन्योरशिप प्रोग्राम के लिए आवंटित हो सकता है धन
सीएम अरविंद केजरीवाल का मानना है कि वह शिक्षा किस काम की, जिससे रोजगार न मिले। इसलिए दिल्ली सरकार के स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम शुरू किया गया है, ताकि बच्चे पढ़ाई पूरी करने के बाद खुद का बिजनेस शुरू कर सकें। अब इस प्रोग्राम के अच्छे नतीजे आने लगे हैं। इससे उत्साहित होकर दिल्ली सरकार आंत्रप्रिन्योरशिप प्रोग्राम को कॉलेजों में भी शुरू करना चाहती है। बताया जा रहा है कि कॉलेजों में फाइनल इयर और प्री फाइनल इयर के बच्चों के लिए यह प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। ताकि उनको कॉलेज से निकलने के बाद नौकरी तलाशने की जरूरत न पड़े, बल्कि वो खुद का बिजनेस शुरू कर सकें। इससे और लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसी उद्देश्य से केजरीवाल सरकार इस बार के बजट में आंत्रप्रिन्योरशिप प्रोग्राम के लिए भी धनराशि आवंटित कर सकती है।
78,800 करोड़ का था दिल्ली का पिछला बजट
दिल्ली सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 78,800 करोड़ रुपए का भारी भरकम बजट पेश किया था, जो ‘‘साफ-सुंदर और आधुनिक दिल्ली’’ थीम पर आधारित था। सरकार का यह बजट दिल्ली में रहने वाले हर तबके को ध्यान में रख कर बनाया गया था। जिसमें सड़कों के सौंदर्यीकरण, फ्लाईओवर, इलेक्टिक बसें, बस डिपों का विद्युतीकरण, बस सेल्टर समेत अन्य मुद्दों पर फोकस किया गया था। दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 21 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। बता दें कि 2015 में दिल्ली का बजट महज 30,940 करोड़ रुपए का ही था, जो बीते वित्तीय वर्ष में ढाई गुना तक बढ़कर 78,800 करोड़ हो गया। केजरीवाल सरकार अपने नागरिकों को कई मुफ्त सहूलियतें देती है। इसके बाद भी दिल्ली का बजट हमेशा ही मुनाफे का रहा है। इस बार का बजट भी मुनाफे का रहने वाला बताया जा रहा है।