फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रामीण दिल्ली में पहली बार शिशु मृत्युदर में 50 फीसदी कमी

Mon, 03 Jun 2019 06:28 AM IST
राजेश सैनी परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

-ग्रामीण ने शहरी क्षेत्र को पछाड़ा, दिल्ली में 16 पहुंची शिशु मृत्युदर
-गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य योजनाएं देने का मिल रहा असर
विज्ञापन
शिशु
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कुछ राज्यों को छोड़ दें तो देश में शिशु मृत्युदर को लेकर बेशक सुधार देखने को मिला है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में पहली बार तस्वीर बदली नजर आ रही है। दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में सालाना होने वाली बच्चों की मौत में रिकॉर्ड सुधार आया है। पहली बार ग्रामीण दिल्ली के शिशु मृत्युदर में 50 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। साल 2016 में दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में शिशु मृत्युदर प्रति 1000 बच्चों पर 24 थी, जोकि 2017 में 12 दर्ज रह गई। वर्ष 2011 से अभी तक यह सुधार सबसे अधिक है। दिल्ली के पश्चिमी, उत्तर पश्चिम और दक्षिणी क्षेत्र में आने वाले इन गांवों में अब बच्चों की मृत्युदर शून्य तक लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 2030 तक का लक्ष्य तय किया है। 

विज्ञापन


हाल ही में आईएसआरएस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में कुल शिशु मृत्युदर (आईएमआर) वर्ष 2017 के दौरान प्रति एक हजार 16 दर्ज हुआ। इसमें 12 ग्रामीण और 16 बच्चे शहरी क्षेत्र में मृत्यु के शिकार हुए। जन्म लेने के बाद से एक वर्ष के भीतर होने वाली मौत इसमें शामिल हैं। साल 2016 की बात करें तो कुल शिशु मृत्युदर 18 थी, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में 24 और शहरी दिल्ली में शिशु मृत्युदर 17 दर्ज की गई थी। इस कामयाबी पर दिल्ली सरकार से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। 

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बेहतर सेवाओं के लिहाज से ग्रामीण दिल्ली हमेशा से ही उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहां शिशु मृत्युदर के अलावा 5 वर्ष तक की आयु में मरने वाले बच्चों में भी कमी आ रही है। विभाग का तर्क है कि जननी सुरक्षा योजना से जमीनी स्तर पर काफी बदलाव हुआ है। इस योजना के तहत बीपीएल, एससी/एसटी परिवार की गर्भवती महिला को 500 से 700 रुपये प्रतिमाह तक की सहायता मिलती है। इसके अलावा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शिशु और मां को अस्पताल में दवाओं से लेकर जांच व उपचार तक दिल्ली सरकार के अस्पतालों में नि:शुल्क मिल रहा है। विभाग ने अस्पताल आने-जाने के लिए निशुल्क कैट्स एंबुलेंस, बड़े अस्पतालों में आईसीयू केयर प्रबंधन और टीकाकरण को इस बदलाव के मुख्य कारण बताए हैं। 
विज्ञापन


वर्ष    शिशु मृत्युदर      ग्रामीण       शहरी
2017     16               12           16
2016     18               24           17
2015     18               27           18
2014     20               32           20
2013     24               35           22
2012     25              36            23
2011     28              36            26

नोट : आंकड़े एसआरएस रिपोर्ट के अनुसार
 

विज्ञापन

एक वजह ये भी 

दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार राजधानी के अस्पतालों में प्रसूति की स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। वर्ष 2007 के दौरान अस्पतालों में 74.57 फीसदी प्रसूति होती थीं, जबकि अब 87 फीसदी से भी ज्यादा है। वहीं, योग्य स्वास्थ्य कर्मियों की देखभाल में प्रसूति 90 फीसदी से ज्यादा हो रही हैं।  2007 में ही ये स्थिति करीब 79 फीसदी थी। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पतालों में प्रसूति होने से जच्चा-बच्चा दोनों के जीवन को संकट से बचाया जा सकता है।

शिशु मृत्युदर को लेकर जमीनी स्तर पर संतोषजनक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इस आंकड़े को शून्य तक ले जाने में अभी और भी ज्यादा मेहनत की जरूरत है। साथ ही अस्पतालों में आईसीयू और शिशु केयर पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। - डॉ. केके अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष-आईएमए

जन भागीदारी से स्वास्थ्य को बेहतर मुकाम पर लाया जा सकता है। शिशु व मातृ मृत्युदर के अलावा कुपोषण इत्यादि को लेकर चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों की वजह से सफलता अब दिखाई देनी लगी है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों को मजबूती देने की जरूरत है। -डॉ. सुमेध, राष्ट्रीय अध्यक्ष-फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन

दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं हमेशा से ही मुद्दा रही हैं, लेकिन कुछ वर्षों में काफी काम हुआ है। आशा वर्कर से लेकर अस्पतालों में बढ़ रहीं प्रसूतियां इसके पीछे वजह है। हालांकि, ग्रामीण दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को और मजबूती देने की जरूरत है।- डॉ. अंकित ओम, चेयरमैन-यूआरडीए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें