अमर उजाला की खबर का असर!
- नूह में खाद वितरण पर बड़ा सवाल, जिलेभर में कार्रवाई की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले में यूरिया और डीएपी खाद की कालाबाजारी को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और बुधवार को प्रमुखता से प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन ने आखिरकार सख्त रुख अपना लिया है। गुरुवार को सीएम फ्लाइंग गुरुग्राम और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने तावडू उपमंडल के गांव जलालपुर स्थित पैक्स खाद गोदाम पर छापेमारी कर खाद वितरण व्यवस्था में बड़े घोटाले का खुलासा किया। जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के मिलान के दौरान 890 खाद के कट्टे गायब मिले, जिससे कृषि विभाग में हड़कंप मच गया। जिले में लंबे समय से किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खाद बेचे जाने की शिकायतें मिल रही थीं। 267 रुपये का यूरिया 400 से 500 रुपये और 1650 रुपये का डीएपी 2200 से 2400 रुपये तक बेचा जा रहा था। नूंह, पिनगवां, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और तावडू के किसान लगातार आरोप लगा रहे थे कि खाद विक्रेता उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ था।
गुरुवार दोपहर मिली जानकारी के अनुसार, जांच टीम ने जलालपुर पैक्स गोदाम में स्टॉक रजिस्टर, बिलों और पीओएस मशीन के रिकॉर्ड का मिलान किया। रिकॉर्ड में 700 बैग इफको यूरिया, 140 बैग इफको डीएपी और 50 बैग एमओपी, यानी कुल 890 खाद के कट्टे दर्ज थे, लेकिन मौके पर यह स्टॉक नहीं मिला। सेल्समैन अबूल हसन से पूछताछ की गई, लेकिन वह गायब स्टॉक का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद टीम ने सभी दस्तावेज जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में पीओएस मशीन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद यह आशंका और गहरा गई है कि किसानों के लिए भेजी गई खाद का बड़ा हिस्सा कागजों में खपा दिया गया या फिर कालाबाजारी की भेंट चढ़ गया। जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है और दोषियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। कृषि विभाग के एसडीओ अजीत तंवर ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया या डीएपी बेचने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले के सभी खाद विक्रेताओं की रिपोर्ट मंगाई जा रही है और शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे निजी दुकानों के बजाय सहकारी समितियों (पैक्स) से ही खाद खरीदें।