राजधानी के निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी मामले में एक और झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सरकार के समक्ष फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश करने के लिए स्कूलों को तीन माह का समय देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने स्कूलों को 22 अगस्त तक का सशर्त समय प्रदान किया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल इस अवधि में अपनी इच्छानुसार अभिभावकों से बढ़ी फीस नहीं वसूलेंगे।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने निजी स्कूलों की एक्शन कमेटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान स्कूलों के उस तर्क को खारिज कर दिया कि सरकार ने उन्हें 31 जुलाई तक प्रस्ताव देने को कहा था, लेकिन इस अवधि में प्रस्ताव देना संभव नहीं है।
ऐसे में उन्हें तीन माह का समय प्रदान किया जाए। अदालत ने दिल्ली सरकार के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि यदि अधिक समय दिया गया, तो बिना कारण अभिभावक व बच्चे परेशान होंगे।
अदालत ने स्कूलों के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वर्तमान में उनके खाते पूरी तरह तैयार नहीं है और सरकार की बिना इजाजत फीस बढ़ाने को चुनौती देने वाली याचिका हाल ही में खारिज हुई है।
सरकार ने दिया स्कूलों के फायदे में चलने का तर्क
कोर्ट
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अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड तैयार करने में कितना समय लगता है, आपके खाते तैयार होने चाहिए। यदि आप उचित समय में रिकॉर्ड पेश करते हैं, तो सरकार भी आपके तर्क पर विचार करेगी।
अदालत ने स्कूलों को 22 अगस्त तक फीस बढ़ोतरी संबंधी अपना प्रस्ताव सरकार के समक्ष पेश करने की सशर्त इजाजत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि इस अवधि में कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ाएगा और न ही अभिभावकों से अधिक फीस वसूली जाएगी।
इससे पूर्व दिल्ली सरकार ने कहा कि स्कूलों में फीस बढ़ाने की जरूरत नहीं है, इसी कारण स्कूल अपने खाते पेश नहीं कर रहे। सरकार ने सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे फीस बढ़ाने के संबंध में अपना प्रस्ताव 31 जुलाई तक पेश करें।
स्कूलों को बच्चों की संख्या, उनसे ली जा रही फीस, स्कूल के खातों का रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था, ताकि उनका अध्ययन करके कोई निर्णय लिया जा सके।
सरकार का मानना है कि जो स्कूल पहले से ही फायदे में चल रहे हैं, उनको फीस बढ़ाने की जरूरत नहीं है। लगभग 1200 में से मात्र 100 के करीब स्कूलों ने अभी तक प्रस्ताव पेश किया है।