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कड़े संघर्ष के बीच पिता की शिक्षा और ससुराल के सहयोग ने दिलाई बड़ी सफलता

Sun, 15 May 2016 12:28 AM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव

सार

  • प्राइमरी टीचर से आईपीएस बनने तक का तय किया सफर
  • एचपीएस पूनम दलाल दहिया ने यूपीएससी परीक्षा में पाया है 308वां रैंक
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पूनम दलाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झज्जर जिले के छारा गांव की रहने वाली पूनम दलाल दहिया ने साबित कर दिया है कि परिजनों की प्रेरणा और उनके सहयोग से कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने ट्यूशन पढ़ाने और प्राइमरी में टीचिंग करने से लेकर यूपीएससी परीक्षा पास करने तक का सफर तय कर लिया है।
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उनका रैंक 308वां है, जिसमें उनका आईपीएस बनना लगभग तय माना जा रहा है। इस समय वह विजिलेंस में एसीपी के रूप में कार्यरत हैं। करीब आठ साल पहले सिर से  पिता का साया उठ गया, लेकिन उनकी शिक्षा हमेशा साथ रही।

पूनम कहती हैं कि पुराने वक्त में भी उनके पिता रंधावा सिंह दलाल समय से आगे सोचने वाले इंसान थे। इसीलिए तो जब 1982 में पूनम पैदा हुईं तो उन्होंने खाड़ी देशों में रहते हुए अपनी पत्नी को पत्र लिखा था कि अब बेटी के लिए घर में अंग्रेजी अखबार लगवाना। तब वह लोग दिल्ली में रह रहे थे।
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बेटी को बराबरी और कई मामलों में बेटों से भी आगे रखने का फर्ज निभाया। सरकारी की जगह निजी स्कूल में पढ़ाया। अब बेटी ने अपनी सफलता पिता को समर्पित कर दी है। पूनम की मां सुदेश कुमारी इस समय बहादुरगढ़ के बालौर में प्राइमरी टीचर हैं।
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परिवार के साथ पूनम दलाल - फोटो : अमर उजाला
पूनम दलाल कुछ दिनों में आईपीएस बन जाएंगी। लेकिन उनकी जिंदगी संघर्षों से भरी रही है, जो मध्यम क्लास की हर लड़की को आगे बढने की प्रेरणा देती है। 12वीं पास करने के बाद उन्होंने जेबीटी की। 2002 में उन्होंने एमसीडी स्कूल सेक्टर-24 रोहिणी में टीचर की नौकरी शुरू की।

इससे पहले ट्यूशन पढ़ाया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्राचार से ग्रेजुएशन किया और वर्ष 2007 में वह दिल्ली के असीम दहिया के साथ परिणय सूत्र में बंध गईं। कस्टम एक्साइज डिपार्टमेंट में कार्यरत उनके पति ने हमेशा पूनम को आगे बढ़ाने में उनका साथ दिया।

अगस्त 2015 में जब उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी तो वह नौ माह की गर्भवती थीं। दिसंबर में जब मेन्स की परीक्षा में बैठीं तो उनका बेटा विक्रमादित्य तीन माह का हो चुका था। ऐसे में उनकी सास ने मां की भूमिका निभाते हुए बच्चे को खुद संभाला और बहू को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। ससुर रणधीर सिंह दहिया ने बेटी की तरह दुलार दिया।

कई क्षेत्रों का है अनुभव
2002: प्राइमरी स्कूल में टीचर
बैंक पीओ के रूप में चंडीगढ़ की एसबीआई ब्रांच में नौकरी
एसएससी में ऑल इंडिया लेवल पर सातवीं रैंक ली
दो बार रेलवे की एलाइड सर्विस में चयन हुआ।
आरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़ी।
2010 में एचपीएस के रूप में चयनित
फरीदाबाद और गुड़गांव में एसीपी के पद पर कार्यरत हैं।
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