दिल्ली हाईकोर्ट ने दुर्लभ बीमारी से जूंझ रहे दो साल के मासूम बच्चे के पिता की ओर से आर्थिक मदद के लिए दायर याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में बच्चे के पिता ने कहा है कि वह अपने बेटे की दुर्लभ बीमारी के इलाज का खर्च नहीं उठा सकता।
न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार से उसका रुख पूछा। इसके साथ ही पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 22 जून के लिए तय कर दी।
इस मौके पर दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने पीठ के निर्देश को स्वीकार किया। यह याचिका दो साल के मासूम बच्चे की नाम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि बच्चा गंभीर ग्रैन्युलोमेटस बीमारी (सीजीडी) से पीड़ित है, जो प्राथमिक प्रतिरक्षा की कमी संबंधी आनुवांशिक बीमारी है।
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स बीमारी के कारण रोगों के खिलाफ लड़ने की शारीरिक क्षमता कम हो जाती है। बच्चे के पिता ने याचिका में कहा कि बीमारी का इलाज ‘‘कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट’’ है जिस पर 15 लाख रुपए की लागत आएगी, लेकिन वह इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकता। याचिका में बच्चे के पिता ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रतिवेदन के बाद उन्हें फरवरी में तीन लाख रुपए स्वीकृत हुए थे, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता के लिए उनके द्वारा 27 फरवरी को दिए गए प्रतिवेदन पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। याचिकाकर्ता ने कहा कि धन की कमी की वजह से एम्स में बच्चे का इलाज भी अब तक शुरू नहीं हो सका है और अस्पताल ने ट्रांसप्लांट के लिए अगली तारीख 26 जून की दी है।
याचिका में दावा किया गया कि अगर तब तक जरूरी रकम नहीं प्राप्त हुई तो इलाज में और विलंब हो जाएगा। इसलिए उन्होंने इस अवधि से पहले सरकार से आर्थिक मदद मिलने के लिए निर्देश देने की मांग की है।